खुले कारागारों के विस्तार पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर मामला किया दर्ज

Amir Ahmad

22 April 2026 12:37 PM IST

  • खुले कारागारों के विस्तार पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर मामला किया दर्ज

    दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में खुले कारागारों की स्थापना, संचालन और विस्तार सुनिश्चित करने के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट हालिया निर्देशों के पालन में उठाया गया।

    चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने यह आदेश उस फैसले के संदर्भ में दिया. जो 26 फरवरी को 'सुहास चकमा बनाम भारत संघ व अन्य' मामले में पारित हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुले सुधारात्मक संस्थानों की आवश्यकता और व्यवहार्यता का आकलन करने तथा इनके लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में निगरानी समिति गठित की जाए, जिसकी अध्यक्षता राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा की जाए। साथ ही हाईकोर्टों को इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए स्वतः संज्ञान लेकर याचिकाएं दर्ज करने को कहा गया।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि समिति में गृह सचिव और कारागार विभाग के सीनियर अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति खुले कारागारों के प्रभावी उपयोग, संचालन और विस्तार की निगरानी करेगी, पात्र कैदियों की पहचान कर उन्हें बंद जेलों से खुले कारागारों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी और समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करेगी।

    मामले में अदालत ने भारत संघ, दिल्ली सरकार के गृह विभाग, महानिदेशक कारागार, दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पक्षकार बनाया है। अदालत ने सीनियर एडवोकेट अरविंद निगम को एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया।

    हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह एक हलफनामा दाखिल कर बताए कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए और समिति का गठन हुआ है या नहीं। साथ ही, दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से भी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया।

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