यौन उत्पीड़न के आरोप वाले गुमनाम पोस्ट हटाने की मांग: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार उमर राशिद की याचिका पर नोटिस जारी किया

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    दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार उमर राशिद की उस याचिका पर गुरुवार को नोटिस जारी किया, जिसमें उनके खिलाफ पिछले साल महिला वकील द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए गुमनाम पोस्ट हटाने की मांग की गई। इन पोस्ट में राशिद पर यौन उत्पीड़न समेत गंभीर आरोप लगाए गए।

    जस्टिस मनोज जैन ने राशिद की मानहानि याचिका में दायर अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राशिद की ओर से पेश वकील अदित पुजारी से यह भी पूछा कि क्या पक्षकारों के बीच मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की संभावना है। इस पर वकील ने बताया कि दोनों पक्ष पहले रिश्ते में थे।

    कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि राशिद के खिलाफ लगाए गए आरोप, चाहे वे सही हों या गलत, बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। इसके बाद कोर्ट ने अंतरिम राहत की मांग पर प्रतिवादियों से जवाब मांगा।

    इससे पहले इसी मामले में एक समन्वय पीठ ने इस महीने की शुरुआत में प्रतिवादियों को समन जारी किया।

    मामला दो महिला वकीलों द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए गुमनाम पोस्ट से जुड़ा है। इन पोस्ट में राशिद पर बलात्कार और कथित तौर पर “ज़बरदस्ती बीफ खिलाने” सहित गंभीर आरोप लगाए गए।

    इन आरोपों के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मई 2025 में राशिद के खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह कार्रवाई 'सह्याद्री राइट्स फोरम' के संयोजक तन्मय एन. की शिकायत के बाद की गई थी। उन्होंने गुमनाम सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर पत्रकार के खिलाफ जांच की मांग की।

    NHRC ने 23 मई 2025 को उमर राशिद और उस समय उनके नियोक्ता रहे समाचार पोर्टल द वायर, दोनों के नाम से मामला दर्ज किया और दिल्ली पुलिस आयुक्त को आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया।

    करीब 300 दिनों से अधिक चली जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में आगे कार्रवाई के लिए कोई आधार नहीं पाया। 6 अक्टूबर 2025 को दिल्ली पुलिस आयुक्त ने NHRC के समक्ष रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि मामले में आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया कि कथित पीड़िता ने अपनी पहचान और पता बताने से इनकार किया था और वह मामले को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखती थी।

    NHRC की 13 मार्च की कार्यवाही में कहा गया कि दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के संबंध में शिकायतकर्ता की ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

    इसके बाद NHRC ने मामले में आगे किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं मानी और कार्यवाही बंद की। आयोग ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मामले में आगे हस्तक्षेप जरूरी नहीं है और मामला बंद किया जाता है।

    अब दिल्ली हाईकोर्ट राशिद की ओर से दायर मानहानि मुकदमे में सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की अंतरिम मांग पर प्रतिवादियों के जवाब पर सुनवाई करेगा।

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