राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के गठन पर दो महीने में फैसला लें केंद्र: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

26 Aug 2026 1:52 PM IST

  • राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के गठन पर दो महीने में फैसला लें केंद्र: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के गठन की मांग वाली याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया।

    कोर्ट ने याचिका को केंद्र सरकार के समक्ष अभ्यावेदन के रूप में लेने का निर्देश देते हुए कहा कि इस पर तय समय के भीतर निर्णय लेकर याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी दी जाए।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह आदेश इंडियन प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

    याचिका में राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग अधिनियम, 2023 की धारा 3 के तहत राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के गठन और उसके प्रावधानों को लागू करने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग की गई।

    याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि 2023 के कानून की धारा 56 के तहत इंडियन नर्सिंग काउंसिल को समाप्त किया जाए।

    याचिका में कहा गया था कि राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के गठन में देरी मनमानी और भेदभावपूर्ण है तथा संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती है, खासकर तब जब अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए संबंधित आयोगों का गठन किया जा चुका है।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आदेश में कहा,

    "यह अदालत उचित समझती है कि वर्तमान याचिका को याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए अभ्यावेदन के रूप में लिया जाए और प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे आज से दो महीने की अवधि के भीतर इस पर फैसला लें और याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी दें।"

    एसोसिएशन ने खुद को नर्सों के कल्याण, हितों और पेशेवर उन्नति के लिए देशभर में काम करने वाला गैर-सरकारी संगठन बताया। याचिका में कहा गया कि राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग अधिनियम, 2023 का उद्देश्य तत्कालीन इंडियन नर्सिंग काउंसिल की जगह एक वैधानिक नियामक व्यवस्था स्थापित करना है, जो देश में नर्सिंग और मिडवाइफरी की शिक्षा, प्रशिक्षण और पेशेवर कार्यप्रणाली को नियंत्रित करे।

    याचिकाकर्ता के अनुसार 2023 का कानून और उसके तहत बनाए गए नियम फरवरी-मार्च 2024 में लागू हो गए। इसके बाद केंद्र सरकार ने 14 मार्च 2024 को राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के विभिन्न सदस्यों और पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए। हालांकि, वैधानिक व्यवस्था लागू होने और नियुक्तियों के लिए आवेदन मांगे जाने के बावजूद अब तक आयोग का गठन नहीं किया गया।

    याचिका में कहा गया कि राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग के गठन के अभाव में पूर्ववर्ती इंडियन नर्सिंग काउंसिल ही नियामक कार्य करता रहा है, जबकि 2023 का कानून उसे बदलने के लिए बनाया गया।

    याचिकाकर्ता ने सरकार से सूचना के अधिकार के तहत मिली 7 जुलाई 2026 की जानकारी का भी हवाला दिया। इसके अनुसार, सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब तक राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग में किसी सदस्य या पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई।

    एसोसिएशन ने हाईकोर्ट से आयोग के गठन और उसके सदस्यों तथा पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की थी। उसका कहना था कि 2023 के कानून में निर्धारित व्यवस्था को बिना और देरी के लागू किया जाना चाहिए।

    हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिका का निपटारा करते हुए केंद्र को दो महीने के भीतर अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।

    कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि निर्णय के बाद कोई नई शिकायत या समस्या सामने आती है तो वह नई याचिका के जरिए फिर अदालत का रुख कर सकता है।

    अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story