जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: NIA जांच की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार, कहा फैसला केंद्र सरकार का अधिकार
Amir Ahmad
24 July 2026 5:19 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET पेपर लीक के विरोध में 20 जुलाई को आयोजित संसद चलो छात्र प्रदर्शन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी मामले की जांच NIA को सौंपने का निर्णय अदालत नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को करना होता है।
चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 की धारा 6 के तहत NIA जांच का निर्णय केंद्र सरकार की संतुष्टि के आधार पर लिया जाता है और अदालत उसकी जगह अपना मत नहीं दे सकती।
चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से कहा,
"आपकी मांग NIA से जांच कराने की। यह तय करना संबंधित प्राधिकारियों का काम है कि किसी अपराध की जांच राज्य पुलिस करेगी या NIA। जहां तक NIA की बात है इस पर फैसला केंद्र सरकार को लेना है। हम केंद्र सरकार की संतुष्टि की जगह अपनी संतुष्टि नहीं रख सकते।"
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामला सार्वजनिक महत्व का है, इसलिए नोटिस जारी किया जाना चाहिए।
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि यदि केंद्र सरकार उचित समझे तो वह कानून के तहत किसी भी मामले की जांच NIA को सौंप सकती है। इसके लिए पूरी कानूनी व्यवस्था पहले से मौजूद है।
बाद में याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसके बाद अदालत ने मामले का निस्तारण किया।
याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से दायर की गई। इसमें दावा किया गया कि NEET पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन बाद में राजनीतिक आंदोलन का रूप ले गया और इसके पीछे विदेशी वित्तपोषित संगठनों तथा राजनीतिक तत्वों की साजिश हो सकती है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि NIA कोई प्रारंभिक जांच एजेंसी नहीं बल्कि अनुसंधान एजेंसी है।
अदालत ने कहा कि NIA की जांच शुरू होने से पहले FIR दर्ज होना और राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा, संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास हुआ, पत्रकारों पर हमले हुए और पुलिसकर्मी घायल हुए। साथ ही दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का आरोप लगाते हुए अदालत से पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मंगाने का आग्रह किया गया।
हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया, उनमें हाल ही में FIR दर्ज हुई और कानून के तहत संबंधित एजेंसियां आवश्यक कार्रवाई करेंगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर वह किसी विशेष जांच एजेंसी को जांच सौंपने का निर्देश नहीं दे सकती।
पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष रखता है, तो वे कानून के अनुसार उस पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।


