आसिया अंद्राबी की अपील पर NIA से जवाब तलब, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड

Amir Ahmad

3 Aug 2026 5:12 PM IST

  • आसिया अंद्राबी की अपील पर NIA से जवाब तलब, दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड

    दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी और उसकी दो सहयोगियों की ओर से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत हुई दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपीलों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जवाब मांगा।

    जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने सजा पर रोक लगाने की मांग वाली अर्जी पर NIA को नोटिस जारी किया। साथ ही ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड तलब करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि यदि रिकॉर्ड में कोई इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज है तो उसे अलग फोल्डर में सुरक्षित रखा जाए।

    हाईकोर्ट ने अपील दाखिल करने में हुई देरी को भी माफ किया। अदालत ने माना कि अपीलकर्ताओं के निकट संबंधी जम्मू-कश्मीर में रहते हैं और समय पर अपील दाखिल करने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।

    कोर्ट ने तीनों अपीलकर्ताओं को अपने पूर्व आपराधिक और अन्य रिकॉर्ड से संबंधित हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया।

    मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।

    आसिया अंद्राबी, सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन ने 14 जनवरी को ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाए गए दोषसिद्धि के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए द्वारा शुरू की गई जांच से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दुख्तरान-ए-मिल्लत के सदस्य ऑनलाइन मंचों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को भड़काने, सशस्त्र उग्रवाद को बढ़ावा देने तथा जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग कर पाकिस्तान में मिलाने की वकालत कर रहे थे।

    NIA के अनुसार, दुख्तरान-ए-मिल्लत महिलाओं का एक अलगाववादी संगठन है जिसका घोषित उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करना था।

    ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि तीनों आरोपी प्रतिबंधित संगठन की प्रमुख सदस्य थीं और भाषणों, सार्वजनिक सभाओं तथा सामाजिक माध्यमों के जरिए अलगाववादी, भड़काऊ और भारत विरोधी प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।

    इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने तीनों को UAPA की विभिन्न धाराओं के अलावा भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और लोक शांति भंग करने वाले बयान देने संबंधी धाराओं में दोषी ठहराया था।

    ट्रायल कोर्ट ने यह भी माना था कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए सशस्त्र संघर्ष का समर्थन, प्रचार और प्रोत्साहन किया तथा धर्म के नाम पर कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की वकालत करते हुए हिंसक गतिविधियों का भी समर्थन किया।

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