गोद लिए बेटे के व्यवहार से परेशान मां ने CARA को कस्टडी सौंपने की मांग की, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
Amir Ahmad
24 Sept 2026 4:32 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला की उस याचिका पर केंद्र सरकार, Central Adoption Resource Authority (CARA) और Child Welfare Committee (CWC) को नोटिस जारी किया, जिसमें उसने अपने गोद लिए नाबालिग बेटे की कस्टडी CARA, CWC या अदालत द्वारा उपयुक्त समझे जाने वाले किसी सरकारी या निजी संस्थान को सौंपने की मांग की। महिला ने याचिका में बच्चे में कथित बौद्धिक अक्षमता, हाइपरसेक्सुअल व्यवहार और लगातार बढ़ते आक्रामक आचरण का हवाला दिया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केंद्र सरकार, CARA और CWC से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
याचिका के अनुसार, महिला और उसके पति ने 2018 में सक्षम दत्तक ग्रहण प्राधिकरणों के माध्यम से सभी निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्चे को गोद लिया था। उस समय बच्चा करीब छह साल का था और असम के एक अनाथालय में रह रहा था।
महिला का आरोप है कि गोद लिए जाने के बाद बच्चे के व्यवहार में आक्रामकता और अनुचित गतिविधियां सामने आने लगीं। याचिका में दावा किया गया कि एक महिला छात्र से जुड़ी घटना के बाद बच्चे को एक स्कूल से निकाल दिया गया। इसके बाद अन्य स्कूलों में भी छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के कारण उसका दाखिला समाप्त कर दिया गया।
याचिका में महिला ने बताया कि उसके पति की 9 मई 2021 को मृत्यु हो गई। इसके बाद वह अपनी बुजुर्ग मां और बहन के साथ रहने के लिए अलीगढ़ चली गई। महिला का आरोप है कि इसके बाद नाबालिग ने घर से पैसे और कीमती सामान चोरी करना शुरू कर दिया और कई बार घर से भाग भी गया। इस संबंध में पुलिस में शिकायत भी की गई।
महिला के मुताबिक, उसने बच्चे के इलाज और मेडिकल देखभाल की व्यवस्था की। बाद में कराई गई मेडिकल जांच में उसके बौद्धिक रूप से दिव्यांग होने और हाइपरसेक्सुअल व्यवहार की बात सामने आई।
याचिका में मई 2026 में जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र का भी हवाला दिया गया। इसमें बच्चे को 69 IQ के साथ हल्की बौद्धिक अक्षमता और 50 प्रतिशत दिव्यांगता दर्ज की गई।
महिला ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि बच्चे की कस्टडी CARA, CWC या अदालत द्वारा उपयुक्त समझे जाने वाले किसी सरकारी अथवा निजी संगठन को सौंपने का निर्देश दिया जाए। साथ ही उसने बच्चे को उचित अस्पताल में भर्ती कराकर उसकी मेडिकल जांच और आवश्यक उपचार कराने का भी निर्देश देने की मांग की।
महिला ने अदालत को यह भी बताया कि वह अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार बच्चे के चिकित्सा उपचार और देखभाल का खर्च उठाने के लिए तैयार है।

