आय छिपाकर कमाई कम बताने से नहीं बचेगा पति: दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखा गुजारा भत्ता
Amir Ahmad
16 April 2026 4:37 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई पति अपनी वास्तविक आय छिपाकर खुद को कम कमाने वाला बताकर गुजारा भत्ता देने की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने पत्नी और दो नाबालिग बच्चों के पक्ष में दिए गए 13,000 रुपये प्रतिमाह के अंतरिम गुजारा भत्ते को बरकरार रखते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि यदि पति अपनी आय और वित्तीय स्थिति से जुड़ी जरूरी जानकारी छिपाता है तो अदालत उसके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगा सकती है और उसकी न्यूनतम आय का आकलन स्वयं कर सकती है।
मामले में पति ने दावा किया कि वह एक पर्यवेक्षक के रूप में केवल 12,000 रुपये प्रतिमाह कमाता है और तय किया गया भत्ता अधिक है। वहीं पत्नी ने तर्क दिया कि पति की वास्तविक आय इससे कहीं अधिक है।
अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि पति पहले व्यवसाय करता था और उसने म्यूचुअल फंड तथा कर बचत योजनाओं में निवेश भी किया। साथ ही उसकी आय से जुड़े दस्तावेजों में कई विसंगतियां भी सामने आईं।
अदालत ने कहा,
“पति ने अपने नाम और अपनी फर्म के खातों के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। इससे स्पष्ट होता है कि उसने अपनी वास्तविक आय और वित्तीय स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई है।”
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने पति की आय कम से कम 20,000 रुपये प्रतिमाह मानी और कहा कि 13,000 रुपये का गुजारा भत्ता उचित है।
हाईकोर्ट ने दोहराया कि सक्षम व्यक्ति होने के बावजूद कोई भी पति अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए आय छिपाने का सहारा नहीं ले सकता।

