3 साल का LLM कोर्स वकालत जारी रखते हुए पढ़ाई करने के लिए है: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

26 Aug 2026 3:13 PM IST

  • 3 साल का LLM कोर्स वकालत जारी रखते हुए पढ़ाई करने के लिए है: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि तीन वर्षीय LLM कोर्ट का उद्देश्य ऐसा अवसर देना है, जिसमें छात्र अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई के साथ अदालतों में वकालत भी जारी रख सकें। कोर्ट ने इसी आधार पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक वकील को LLM के दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी, जिसे अनिवार्य उपस्थिति पूरी नहीं करने के कारण परीक्षा से रोक दिया गया।

    जस्टिस जस्मीत सिंह ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी को तीन वर्षीय LLM पाठ्यक्रम 2023-2026 की दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित करने से रोकने की मांग की गई। याचिका में प्रत्येक विषय में निर्धारित 90 घंटे की अनिवार्य कक्षाएं पूरी किए जाने की शर्त का भी मुद्दा उठाया गया। इसके अलावा परीक्षा में बैठने से रोके गए छात्रों की सूची रद्द कर उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की गई।

    याचिकाकर्ता नंबर एक ने बताया कि वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के विधि संकाय में वर्ष 2023 में तीन वर्षीय LLM कोर्स में दाखिल हुआ। हालांकि कम उपस्थिति के कारण उसे दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। उसकी उपस्थिति 43.5 प्रतिशत थी जबकि परीक्षा में बैठने के लिए निर्धारित उपस्थिति 67.5 प्रतिशत थी।

    याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह पेशे से वकील है और अदालतों में नियमित रूप से मामलों की पैरवी करता है। LLM की कक्षाएं दोपहर 12 बजे आयोजित होती हैं, जो अदालतों की कार्यवाही के दौरान व्यस्त समय होता है। इसी कारण वह निर्धारित 67.5 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं कर सका।

    जस्टिस जस्मीत सिंह ने कहा,

    "तीन वर्षीय LLM कोर्स का उद्देश्य ही छात्रों को अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई के साथ अदालतों में वकालत जारी रखने में सक्षम बनाना है।"

    कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि इस पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले छात्रों को अपनी वकालत का लाइसेंस निलंबित करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में LLM की कक्षाएं दोपहर 12 बजे होती हैं और छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान वकालत जारी रख सकते हैं।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता कोर्ट में मौजूद है और वह उपस्थिति में हुई कमी को अगले सेमेस्टर में पूरा करने के लिए बंधपत्र, शपथपत्र और आवश्यक वचन देने को तैयार है। उसने यह भी आश्वासन दिया कि यदि कोई बकाया शुल्क देय है तो उसका भुगतान किया जाएगा।

    हाईकोर्ट ने इन आश्वासनों को उचित मानते हुए याचिकाकर्ता को LLM की पढ़ाई जारी रखने और दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी।

    हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए दिया जा रहा है। अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से सुनवाई के दौरान कोई उपस्थित नहीं था, इसलिए उनके संबंध में याचिका खारिज कर दी गई।

    इन्हीं शर्तों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।

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