दिल्ली हाईकोर्ट ने AI डीपफेक और झूठे बयानों के खिलाफ़ BJP सांसद कंगना रनौत के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की
Amir Ahmad
12 Oct 2026 12:10 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस और BJP सांसद कंगना रनौत के नाम, तस्वीर, आवाज़ और व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य चीज़ों के बिना इजाज़त इस्तेमाल पर रोक लगाई। इसमें AI से बने डीपफेक, छेड़छाड़ किए गए वीडियो, मनगढ़ंत भाषण और झूठे एंडोर्समेंट शामिल हैं।
जस्टिस विकास महाजन ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे रनौत द्वारा बताए गए उल्लंघनकारी कंटेंट को हटा दें और हमेशा के लिए बंद कर दें।
कोर्ट ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी निर्देश दिया कि वे इंटरनेट और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को ज़रूरी निर्देश जारी करें ताकि तय समय के भीतर उन उल्लंघनकारी वेबसाइट्स तक पहुंच को ब्लॉक किया जा सके।
कोर्ट ने कहा कि रनौत का कद उन्हें स्वाभाविक रूप से उनके व्यक्तित्व और उससे जुड़ी चीज़ों पर मालिकाना हक देता है। इसमें कमर्शियल मकसद के लिए उनका इस्तेमाल करने और बिना इजाज़त इस्तेमाल या शोषण के खिलाफ़ उनकी रक्षा करने का विशेष अधिकार भी शामिल है।
कोर्ट ने कहा,
"इसमें वादी (कंगना रनौत) को ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट से सुरक्षा भी शामिल है जिसमें AI से बने/मॉर्फ किए गए, यौन और स्पष्ट डीपफेक शामिल हों।"
यह आदेश रनौत द्वारा दायर एक मुकदमे पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइट्स मनगढ़ंत बयान, छेड़छाड़ किए गए वीडियो, मॉर्फ की गई तस्वीरें और AI से बना कंटेंट फैला रहे थे जो उन्हें गलत तरीके से दिखाते थे।
मुकदमे के अनुसार कुछ डिजिटल रूप से छेड़छाड़ की गई तस्वीरों और वीडियो में उन्हें अनुचित स्थितियों में दिखाया गया, जबकि अन्य कंटेंट में उन्हें ऐसे बयान और राय देते हुए या ऐसी गतिविधियों में शामिल दिखाया गया, जो कभी हुई ही नहीं थीं।
एक्ट्रेस ने कहा कि ऐसा कंटेंट उनके व्यक्तित्व और पब्लिसिटी राइट्स, पहचान के अधिकार और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन करता है, साथ ही यह जनता को गुमराह करने और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की क्षमता भी रखता है।
रिकॉर्ड पर रखे गए मटीरियल की जांच करने के बाद कोर्ट ने पाया कि पहचाने गए कंटेंट में साफ तौर पर अश्लील, मॉर्फ किया गया और AI से बना यौन रूप से स्पष्ट मटीरियल शामिल था, जिसे रनौत ने मंज़ूरी नहीं दी थी। कोर्ट ने माना कि ऐसे कंटेंट को हटाया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सुरक्षा छेड़छाड़ किए गए ऑडियो-विजुअल मटीरियल और AI से बने कंटेंट तक भी फैली हुई है, जो रनौत को गलत तरीके से बयान देते, राय ज़ाहिर करते या ऐसी गतिविधियों में शामिल दिखाते हैं, जो असलियत में कभी नहीं हुईं।
कोर्ट ने कहा,
"ऐसा कंटेंट असल में धोखा देने वाला होता है और आम दर्शकों को यह विश्वास दिलाकर गुमराह कर सकता है कि यह असली है। यह गलत जानकारी और गलत तरीके से पेश करने का काम तब और भी गंभीर चिंता का विषय बन जाता है, जब इसमें वादी (जैसे कि इस मामले में) की तस्वीर और मौजूदा पद का इस्तेमाल किया जाता है, साथ ही झूठे कोट या बयान भी जोड़े जाते हैं।"
कोर्ट ने पाया कि कंगना रनौत का मामला पहली नज़र में मज़बूत है और सुविधा का संतुलन उनके पक्ष में है।
कोर्ट ने माना कि अगर अंतरिम रोक नहीं लगाई गई तो उनकी छवि और व्यक्तित्व को होने वाला संभावित नुकसान वास्तविक और तुरंत हो सकता है और इससे होने वाले नुकसान की भरपाई शायद पैसों के रूप में ठीक से न हो पाए।
इसके अनुसार कोर्ट ने प्रतिवादियों (जिनमें अज्ञात लोग भी शामिल हैं) को कंगना रनौत की अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व से जुड़ी विशेषताओं को बनाने, प्रकाशित करने, दोबारा बनाने, फैलाने, होस्ट करने या किसी अन्य तरह से इस्तेमाल करने से रोक दिया।
कोर्ट ने AI से बने कंटेंट, डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया, हेरफेर किए गए वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग, बनावटी भाषण, झूठे एंडोर्समेंट और उनकी नकल करने वाले कंटेंट को बनाने और फैलाने पर भी रोक लगा दी, जो उन्हें दिखाते हों या दिखाने का दावा करते हों।
प्रतिवादियों को ऐसे अकाउंट, पेज, प्रोफ़ाइल, चैनल, वेबसाइट या अन्य डिजिटल एसेट बनाने या चलाने से भी रोक दिया गया जो गलत तरीके से यह दिखाते हों कि उनका कंगना रनौत के साथ कोई संबंध, जुड़ाव, एंडोर्समेंट या उनकी अनुमति है।

