प्रोबेशन पर कार्यरत कर्मचारी भी 'वर्कमैन'; बर्खास्तगी वैध होने पर भी धारा 17-B का वेतन वापस नहीं लिया जा सकता: दिल्ली हाइकोर्ट
Amir Ahmad
29 Jan 2026 12:42 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रोबेशन पर कार्यरत कर्मचारी भी औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 2(स) के अंतर्गत वर्कमैन की परिभाषा में आते हैं। हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रोबेशनरी कर्मचारी की सेवाएं साधारण बर्खास्तगी के रूप में बिना कलंक लगाए समाप्त की जाती हैं, तो उसके लिए पूर्ण विभागीय जांच आवश्यक नहीं है और ऐसी बर्खास्तगी कानूनन वैध मानी जाएगी।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने एकल जज के आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए यह फैसला सुनाया।
मामला सरिता तिवारी से जुड़ा था जो एम/एस डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड में ट्रेनी एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर के पद पर प्रोबेशन पर कार्यरत थीं। वर्ष 2007 में प्रोबेशन अवधि के दौरान उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई।
कर्मचारी की बर्खास्तगी के आदेश में कथित दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता का उल्लेख था लेकिन कोई औपचारिक विभागीय जांच नहीं की गई। केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण ने पहले इस बर्खास्तगी को अवैध बताते हुए पुनः नियुक्ति और पूर्ण बकाया वेतन का आदेश दिया था।
हालांकि सिंगल जज ने बाद में इस निर्णय में हस्तक्षेप करते हुए बर्खास्तगी को साधारण बर्खास्तगी माना और यह भी कहा कि प्रोबेशनरी कर्मचारी 'वर्कमैन' नहीं है।
डिवीजन बेंच ने बर्खास्तगी को तो वैध ठहराया लेकिन एकल जज के इस निष्कर्ष को खारिज कर दिया कि प्रोबेशनरी कर्मचारी वर्कमैन नहीं होता।
हाइकोर्ट ने कहा कि औद्योगिक कानून में स्थायी और अस्थायी या प्रोबेशनरी कर्मचारियों के बीच 'वर्कमैन' की स्थिति को लेकर कोई भेद नहीं किया गया।
हाइकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पवनेन्द्र नारायण वर्मा बनाम संजय गांधी पीजीआई पर भरोसा करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह देखने के लिए कि बर्खास्तगी दंडात्मक है या नहीं, यह जांचना जरूरी है कि क्या गंभीर आरोपों पर पूर्ण विभागीय जांच हुई दोष सिद्ध हुआ और उसके आधार पर आदेश पारित किया गया। वर्तमान मामले में ऐसा नहीं था, इसलिए कथित दुर्व्यवहार केवल बर्खास्तगी का कारण था, उसका आधार नहीं।
पीठ ने यह भी कहा कि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 17-B के तहत हाईकोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान दिए गए अंतिम आहरित वेतन की राशि नियोक्ता द्वारा दी जानी होगी और बाद में बर्खास्तगी वैध ठहराए जाने के बावजूद वह राशि कर्मचारी से वापस नहीं ली जा सकती।
इन निष्कर्षों के साथ हाइकोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए प्रोबेशनरी कर्मचारी को 'वर्कमैन' का दर्जा देने और धारा 17-B के वेतन संरक्षण को बरकरार रखा।

