कालकाजी मंदिर में महिला उत्तराधिकारियों को पुरुष प्रतिनिधियों के जरिए पूजा सेवा का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट

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    दिल्ली हाईकोर्ट ने कालकाजी मंदिर में पूजा सेवा के अधिकार को लेकर अहम आदेश देते हुए चार महिला उत्तराधिकारियों को अपने परिवार के पुरुष सदस्यों को प्रतिनिधि नियुक्त कर पूजा सेवा करने की अनुमति दी।

    जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने निर्देश दिया कि मंदिर में मिलने वाले चढ़ावे और दान में उनका हिस्सा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराया जाए।

    हाईकोर्ट ने यह आदेश 22 सितंबर को रमेश, राकेश, अशोक और पुष्पा की ओर से दाखिल आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया। आवेदकों ने खुद को स्वर्गीय काली चरण का कानूनी उत्तराधिकारी और कालकाजी मंदिर में पूजा सेवा करने का अधिकार रखने वाला बरिदार बताया। मामले में मुख्य सवाल यह था कि काली चरण की महिला उत्तराधिकारियों को कालकाजी मंदिर में पूजा सेवा करने का अधिकार है या नहीं।

    हाईकोर्ट ने 15 सितंबर 2021 के अपने पूर्व आदेश का उल्लेख किया। उस आदेश में कोर्ट ने काली चरण की बेटियों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को उनकी ओर से पूजा सेवा करने के लिए पुरुष प्रतिनिधि नियुक्त करने की अनुमति दी थी।

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे को पक्षकारों के दावों के अनुसार उनके हिस्से में बांटा जाए और अन्य महिला उत्तराधिकारियों का हिस्सा रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराया जाए।

    पूर्व आदेशों का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम स्तर पर महिला उत्तराधिकारियों को कालकाजी मंदिर में चढ़ावे से जुड़े अधिकारों का लाभ पाने की हकदार माना गया।

    पक्षकारों की सहमति से कोर्ट ने कहा कि फिलहाल महिला कानूनी उत्तराधिकारी व्यक्तिगत रूप से पूजा सेवा नहीं कर सकती हैं, लेकिन मंदिर में चढ़ावे से जुड़े अपने अधिकारों से मिलने वाले लाभ की हकदार रहेंगी।

    इसी आधार पर हाईकोर्ट ने चारों आवेदकों को अपने-अपने परिवार के पुरुष सदस्यों को प्रतिनिधि नियुक्त कर पूजा सेवा करने की अनुमति दी। यह अनुमति पहले की 'बारी' के दौरान अपनाई गई व्यवस्था के अनुसार दी गई।

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और दान की राशि वादी श्रीमती कमलेश शर्मा और प्रतिवादी स्वर्गीय अजय शर्मा के कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच प्रत्येक के 1/6 हिस्से के अनुसार बांटी जाएगी। स्वर्गीय काली चरण की बेटियों श्रीमती प्रेम लता, श्रीमती शांति देवी, श्रीमती कपूरि देवी और श्रीमती पुष्पलता का कुल 4/6 हिस्सा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराया जाएगा।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पूजा सेवा के लिए पक्षकारों की ओर से नियुक्त किए गए प्रतिनिधि परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा की जा रही सेवा में किसी तरह की बाधा या विवाद पैदा नहीं करेंगे।

    यह आदेश 21 सितंबर 2026 से 20 अक्टूबर 2026 तक चलने वाली मौजूदा बारी पर लागू रहेगा।

    मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।

    दिल्ली हाईकोर्ट कालकाजी मंदिर परिसर के पुनर्विकास से जुड़े कई मामलों की सुनवाई कर रहा है। कोर्ट पहले ही फैसला दे चुका है कि मंदिर परिसर में धर्मशालाओं के कब्जाधारी और पुजारी वहां बने रहने का कोई निहित अधिकार नहीं जता सकते।

    हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर में मौजूद झुग्गियों और धर्मशालाओं में रह रहे अनधिकृत कब्जाधारियों को हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को भी दिया। इसके खिलाफ दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने भी अनधिकृत कब्जाधारियों को हटाने की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

    इससे पहले हाईकोर्ट मंदिर के प्रशासन और रखरखाव तथा बरिदारों के बीच बारी के अधिकारों से जुड़े विवादों के समाधान को लेकर भी कई निर्देश जारी कर चुका है, ताकि मंदिर का संचालन सुचारू रूप से जारी रहे।

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