कॉलेज को बड़ा दिल दिखाना चाहिए: DU छात्रसंघ चुनाव में पांच उम्मीदवारों को हाईकोर्ट से राहत, नामांकन खारिज करने का फैसला पलटा

Amir Ahmad

15 Sept 2026 3:28 PM IST

  • कॉलेज को बड़ा दिल दिखाना चाहिए: DU छात्रसंघ चुनाव में पांच उम्मीदवारों को हाईकोर्ट से राहत, नामांकन खारिज करने का फैसला पलटा

    दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026-27 में नामांकन संबंधी खामियों के कारण उम्मीदवारी खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर पांच छात्रों को राहत दी।

    जस्टिस अमित बंसल ने कैंपस लॉ सेंटर और श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स के चुनावों में इन उम्मीदवारों को अलग-अलग पदों पर चुनाव लड़ने की अनुमति दी।

    सुनवाई के दौरान एक याचिका पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि ऐसे मामलों में कॉलेज को बड़ा दिल दिखाना चाहिए।

    कैंपस लॉ सेंटर के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार कन्हैया रंजन और शशांक यादव ने बताया कि निर्धारित जमानत बांड में उनके नाम और पिता के नाम आपस में बदल जाने के कारण उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी गई।

    उनका कहना था कि यह केवल लिपिकीय और अनजाने में हुई गलती थी, जिसका उनकी पहचान या चुनाव लड़ने की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ता।

    उम्मीदवारों की ओर से पेश वकील अपार गुप्ता ने कहा कि दोनों ने 10 सितंबर को नामांकन पत्र दाखिल किए और उन्हें स्वीकार भी कर लिया गया। उसी दिन कॉलेज अधिकारियों ने जमानत बांड में गलती पर आपत्ति जताई। उम्मीदवारों ने अपने नाम की जगह पिता का नाम दर्ज करने के बजाय गलती से अपना ही नाम दर्ज किया।

    वकील ने कहा कि यदि उसी समय यह गलती बता दी जाती तो उम्मीदवार तुरंत उसे सुधार देते।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से पेश वकील मोहिंदर रूपल ने अदालत को बताया कि उम्मीदवारों की अंतिम सूची 13 सितंबर को प्रकाशित हो चुकी है और उसका विवरण इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों में भी दर्ज किया जा चुका है। ऐसे में सूची में बदलाव करने में प्रशासनिक कठिनाई हो सकती है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि पिछले वर्ष इसी तरह के एक मामले में समन्वय पीठ ने उम्मीदवारों को सही जमानत बांड दाखिल करने और कॉलेज चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी। अदालत ने कहा कि मौजूदा मामला भी उसी निर्णय के अंतर्गत आता है।

    इसके बाद अदालत ने दोनों उम्मीदवारों को 15 सितंबर को दोपहर तीन बजे तक कॉलेज के समक्ष सही जमानत बांड जमा करने का निर्देश दिया और कहा कि उन्हें 18 सितंबर को होने वाले चुनाव में उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने दिया जाए। कैंपस लॉ सेंटर को संशोधित उम्मीदवार सूची जारी कर दोनों के नाम शामिल करने तथा विश्वविद्यालय को इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों में उनके नाम शामिल करने की आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया। याचिका वकील नमन कुमार के माध्यम से दायर की गई।

    वहीं, श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स के तीन छात्रों ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव पद के लिए उनके नामांकन खारिज किए जाने को चुनौती दी। कॉलेज ने आधार कार्ड और कॉलेज पहचान पत्र जमा नहीं करने के आधार पर उनके नामांकन खारिज किए।

    छात्रों की ओर से पेश वकील पीयूष कालरा ने कहा कि चुनाव के लिए निर्धारित दस्तावेजों की सूची में आधार कार्ड या कॉलेज पहचान पत्र जमा करने की कोई शर्त नहीं थी। इसलिए इन दस्तावेजों के अभाव में नामांकन खारिज करना मनमाना था।

    कॉलेज की ओर से कहा गया कि दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से जारी परामर्श के अनुसार उम्मीदवारों को दोनों दस्तावेज जमा करने थे। कॉलेज ने यह भी कहा कि छात्रों ने इस मुद्दे को कॉलेज की शिकायत निवारण समिति के समक्ष उठाए बिना सीधे हाईकोर्ट का रुख किया।

    अदालत ने 8 सितंबर को कॉलेज की ओर से जारी दस्तावेजों की सूची का अवलोकन किया और पाया कि उसमें आधार कार्ड या कॉलेज पहचान पत्र जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं थी।

    अदालत ने यह भी कहा कि कॉलेज का यह मामला नहीं है कि याचिकाकर्ता वास्तविक छात्र नहीं हैं या उनके पास आधार कार्ड नहीं है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे दस्तावेजों की कोई आवश्यकता है तो नामांकन की जांच के समय उम्मीदवारों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। बाद के चरण में इन दस्तावेजों के अभाव के आधार पर उम्मीदवारों की उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती।

    अदालत ने तीनों छात्रों को भी राहत देते हुए उन्हें 15 सितंबर को दोपहर तीन बजे तक संबंधित दस्तावेज कॉलेज के समक्ष जमा करने का निर्देश दिया और उनकी उम्मीदवारी बहाल करने का आदेश दिया।

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