थर्ड ईयर के लॉ स्टूडेंट्स को पैरा लीगल वालंटियर चयन में प्राथमिकता देने पर विचार करे समिति: दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
22 Aug 2026 4:54 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की उस समिति से कहा, जो पैरा लीगल वालंटियर के चयन की प्रक्रिया देख रही है कि वह थर्ड ईयर के लॉ स्टूडेंट्स को प्राथमिकता देने पर विचार करे, क्योंकि ये छात्र जल्द ही अपनी पढ़ाई पूरी कर वकालत के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे।
अदालत ने समिति को मौजूदा नियमों के अनुसार पैरा लीगल वालंटियर के चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा।
जस्टिस जस्मीत सिंह ने कहा कि चयन प्रक्रिया जल्द पूरी होने से दूसरे और तीसरे वर्ष में पढ़ रहे लॉ स्टूडेंट को पैरा लीगल वालंटियर के रूप में चयनित होने का अवसर मिल सकेगा।
अदालत ने उम्मीद जताई कि समिति थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स के जल्द पढ़ाई पूरी करने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्राथमिकता देने पर विचार करेगी।
अदालत दो लॉ स्टूडेंट्स की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दोनों स्टूडेंट्स दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ संकाय से जुड़े हैं और उन्होंने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ पैरा लीगल वालंटियर के रूप में शामिल किए जाने की मांग की थी। उन्होंने 21 अप्रैल को जारी उस सूचना को भी चुनौती दी थी, जो पैरा लीगल वालंटियर प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित थी।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की पैरा लीगल वालंटियर योजना और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की विधिक सहायता क्लीनिक संबंधी नियमावली के तहत लॉ स्टूडेंट्स को पैरा लीगल वालंटियर के रूप में शामिल करने का प्रावधान है।
उनका कहना था कि कैंपस लॉ सेंटर और लॉ सेंटर-द्वितीय की विधिक सहायता समितियों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ मिलकर पिछले वर्ष सितंबर में चयन प्रक्रिया आयोजित की थी। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों की सूची 28 अक्टूबर 2025 को दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी गई।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार इसके बावजूद दूसरे और थर्ड ईयर के लॉ स्टूडेंट्स को पैरा लीगल वालंटियर के रूप में शामिल नहीं किया गया, जबकि दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पास 600 से अधिक पद रिक्त थे।
अदालत को बताया गया कि चयनित छात्रों की सूची मिलने के बाद दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने नवंबर 2025 में उनके प्रशिक्षण की शुरुआत के लिए कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही थी, लेकिन बाद में यह कार्यक्रम रोक दिया गया।
वहीं दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की संशोधित पैरा लीगल वालंटियर योजना का हवाला दिया गया। इसके तहत शिक्षकों, सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों, वरिष्ठ नागरिकों, समाज कार्य के छात्रों और शिक्षकों, डॉक्टरों, छात्रों और कानून छात्रों, गैर सरकारी संगठनों से जुड़े लोगों तथा अन्य उपयुक्त व्यक्तियों में से पैरा लीगल वालंटियर का चयन किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने योजना का अध्ययन करने के बाद कहा कि इसमें करीब दस अलग-अलग वर्गों से पैरा लीगल वालंटियर के चयन का प्रावधान है। छात्र और कानून छात्र इनमें केवल एक वर्ग हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि किसी एक वर्ग से कितने पैरा लीगल वालंटियर चुने जाएंगे, इसका कोई निश्चित अनुपात निर्धारित नहीं है।
इसी वजह से अदालत ने किसी विशेष वर्ग से निश्चित संख्या में छात्रों के चयन का आदेश देने के बजाय समिति से मौजूदा नियमों के अनुसार चयन प्रक्रिया जल्द पूरी करने का अनुरोध किया।
अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए चुना जाता है और इसके लिए दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली समिति सबसे उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करती है।
हाईकोर्ट ने समिति से कहा कि वह मौजूदा नियमों के अनुसार चयन प्रक्रिया जल्द पूरी करे, ताकि दूसरे और तीसरे वर्ष के लॉ स्टूडेंट को भी पैरा लीगल वालंटियर के रूप में चयन का अवसर मिल सके।
अदालत ने विशेष रूप से कहा कि थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स जल्द ही पढ़ाई पूरी करने वाले हैं, इसलिए समिति को इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्राथमिकता देने पर विचार करना चाहिए।
अदालत ने उम्मीद जताई कि पूरी प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी।


