दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: POCSO पीड़िता को ट्रायल जज का हौसला बढ़ाने वाला संदेश और 10.50 लाख रुपये का मुआवजा सौंपे DLSA

  • दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: POCSO पीड़िता को ट्रायल जज का हौसला बढ़ाने वाला संदेश और 10.50 लाख रुपये का मुआवजा सौंपे DLSA

    दिल्ली हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को निर्देश दिया कि POCSO मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी के खिलाफ फैसला सुनाने वाले ट्रायल कोर्ट के जज का पीड़िता के नाम लिखा संदेश प्रिंट कराकर उसे या उसके परिवार को सौंपा जाए। इसके साथ ही परिवार को अदालत द्वारा निर्धारित 10.50 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाए।

    जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने DLSA के सचिव को इस निर्देश का दो सप्ताह के भीतर पालन करने को कहा। हाईकोर्ट यह आदेश सुमित शाक्य की उस अपील पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें उसने पॉक्सो मामले में अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी।

    यह मामला बुध विहार थाने में दर्ज POCSO मामले से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ गंभीर यौन हमला करने के आरोप में आरोपी को POCSO Act के तहत दोषी ठहराया। उसे आपराधिक धमकी देने के अपराध में भी दोषी पाया गया।

    ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध की प्रकृति, बच्ची के गहरे मानसिक आघात और उसके जीवन पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उसके परिवार को 10.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

    हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ध्यान दिया कि घटना 23 जुलाई 2023 की है। उस समय पीड़िता की उम्र सात साल बताई गई और अब वह 10 साल की है।

    ट्रायल कोर्ट की एडिशनल सेशन जज रजनी रंगा ने फैसले के अंत में पीड़िता के नाम एक संदेश भी लिखा था। इसमें बच्ची की उस इच्छा का उल्लेख किया गया कि आरोपी के बूढ़ा होने तक जेल में रहने की सजा हो। जज ने बच्ची को इस घटना से आगे बढ़कर अपना जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित किया।

    फैसले में जज ने लिखा था,

    “यह अदालत तुम्हारा बचपन वापस नहीं ला सकती। लेकिन अदालत तुम्हें यह भरोसा दिला सकती है कि तुम्हारी बात सुनी गई। तुम्हारी गुहार स्वीकार की गई। अब बेटा, अपनी जिंदगी जियो। स्कूल जाओ, दोस्त बनाओ, हंसो, खेलो और सपने देखो। यह अदालत तुम्हारे साहस को हमेशा याद रखेगी।”

    इसी संदेश को लेकर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि इसे प्रिंट कराकर पीड़िता या उसके परिवार को मुआवजे की राशि के साथ सौंपा जाए।

    पीठ ने आपराधिक अपील में नोटिस भी जारी किया और निर्देश दिया कि जांच अधिकारी के माध्यम से पीड़िता को नोटिस की तामील कराई जाए। अदालत ने DLSA के सचिव से पीड़िता के परिवार को दिए गए मुआवजे की स्थिति पर रिपोर्ट भी मांगी है।

    हालांकि हाईकोर्ट ने इस चरण पर दोषी की सजा निलंबित करने से इनकार किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, जिसमें फोरेंसिक साक्ष्य भी शामिल हैं, को देखते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगाने से इनकार किया।

    मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी, जब DLSA को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी है।

    अपील को 20 जनवरी 2027 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

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