दिल्ली हाइकोर्ट ने जिला कोर्ट परिसरों में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता रेखांकित की

Amir Ahmad

28 Jan 2026 4:32 PM IST

  • दिल्ली हाइकोर्ट ने जिला कोर्ट परिसरों में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता रेखांकित की

    दिल्ली हाइकोर्ट ने शहर के जिला कोर्ट परिसरों में वकीलों, वादकारियों और सुरक्षा कर्मियों सहित सभी हितधारकों के लिए पर्याप्त आपातकालीन मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस संबंध में दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ता को प्रशासनिक पक्ष के समक्ष अपनी मांग रखने का निर्देश दिया।

    चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जाना उपयुक्त होगा। सुनवाई के दौरान मुख्य जस्टिस ने याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित वकील वकुल शरद शर्मा से कहा कि इस गंभीर विषय की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित करने के लिए धन्यवाद और उन्हें हाइकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष से संपर्क करने का अनुरोध किया।

    सुनवाई के दौरान वकील शर्मा ने केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत संचालित जन आरोग्य मंदिर योजना का उल्लेख करते हुए प्रार्थना की कि इसी प्रकार की आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा सभी जिला कोर्ट परिसरों में भी स्थापित की जाए। उन्होंने दलील दी कि यद्यपि दो अदालत परिसरों में औषधालय की सीमित सुविधा उपलब्ध है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है और जन आरोग्य मंदिर जैसी समग्र चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि जिला कोर्ट परिसरों में प्रतिदिन लगभग 12,000 से 15,000 लोगों की आवाजाही होती है, जिनमें वादकारी, सीनियर सिटीजन, महिलाएं, पुलिस कर्मी और विचाराधीन कैदी शामिल होते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सुविधा का अभाव गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है।

    अधिवक्ता शर्मा ने खंडपीठ को यह भी अवगत कराया कि इस विषय में वह पहले ही रजिस्ट्री को एक अभ्यावेदन दे चुके हैं। इस पर मुख्य जस्टिस ने उन्हें एक और विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का सुझाव दिया।

    अंततः हाइकोर्ट ने आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता को अनुमति दी कि वह दो सप्ताह के भीतर इस संबंध में रजिस्ट्रार जनरल सहित सभी संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करे। हाइकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई भी अभ्यावेदन प्राप्त होने पर सभी प्राधिकरण हाइकोर्ट प्रशासन के परामर्श से उस पर विचार करेंगे और आवश्यक निर्णय व कार्रवाई की जाएगी।

    इसी के साथ जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

    Next Story