दिल्ली पुलिस के लापरवाह रवैये के कारण सरकारी गवाह मुकर जाते हैं: हाईकोर्ट
Amir Ahmad
15 Sept 2026 1:57 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस सिस्टम के उस लापरवाह रवैये पर चिंता जताई, जिसके कारण सरकारी गवाह अक्सर अभियोजन पक्ष के मामले में मुकर जाते हैं।
जस्टिस गिरीश कथपालिया ने हत्या के मामले में एक आरोपी की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी महिला ने एक सह-आरोपी के साथ मिलकर उस व्यक्ति की हत्या की, जिसके साथ उसका कथित तौर पर एक्स्ट्रा-मैरिटल अफ़ेयर था।
यह भी आरोप लगाया गया कि हत्या के बाद आरोपी महिला और उसकी मां ने मृतक के शव को एक बक्से में पैक किया और उसे निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन ले जाने के लिए एक कैब किराए पर ली जहां से सह-आरोपी ने शव को ट्रेन से गुजरात पहुंचाया।
उसके वकील ने बताया कि पहले एक ज़मानत अर्ज़ी वापस ले ली गई, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा कैब ड्राइवर का बयान दर्ज होने के बाद दोबारा कोर्ट में आने की छूट दी गई।
कोर्ट ने रिकॉर्ड पर रखे गए कैब ड्राइवर के मुख्य-परीक्षण (चीफ़-एग्ज़ामिनेशन) के हिस्से की जांच की। अपनी गवाही के दौरान, कैब ड्राइवर ने आरोप लगाया कि उसे एक खास मोबाइल नंबर से लगातार धमकी भरे फ़ोन कॉल आ रहे हैं।
कोर्ट ने देखा कि जब राज्य से पूछा गया कि क्या उस फ़ोन नंबर को ट्रैक किया गया तो संबंधित पुलिस अधिकारी स्थिति स्पष्ट करने में असमर्थ रहे।
SHO/इंस्पेक्टर से भी पूछताछ की गई लेकिन उन्होंने कहा कि कोई कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि कैब ड्राइवर ने कोई औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।
इस पर कोर्ट ने कहा कि यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है और ध्यान दिलाया कि कैब ड्राइवर का बयान 16 अप्रैल, 2024 को दर्ज किया गया।
कोर्ट ने कहा,
"अगर IO (जांच अधिकारी) ट्रायल में मुस्तैदी से शामिल होते तो उन्हें खुद ही इस आरोप की जांच करनी चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस सिस्टम के इसी लापरवाह रवैये के कारण सरकारी गवाह अक्सर अभियोजन पक्ष के खिलाफ मुकर जाते हैं।"
कोर्ट ने आदेश दिया कि आदेश की एक प्रति संबंधित डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (DCP) को भेजी जाए और उन्हें कैब ड्राइवर द्वारा लगाए गए आरोप की जांच करने का निर्देश दिया जाए।
DCP को यह भी निर्देश दिया गया कि अगर उचित समझा जाए तो मामला दर्ज करें और मामले की जाँच करें।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एक स्टेटस रिपोर्ट (स्थिति रिपोर्ट) दाखिल की जाए, जिसमें इस पहलू को भी शामिल किया जाए और जिस पर संबंधित DCP के व्यक्तिगत हस्ताक्षर हों।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।


