प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक कैसे लग सकती है?: करणी सेना प्रमुख को जंतर-मंतर पर अनुमति न देने पर हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा

Amir Ahmad

17 Sept 2026 2:03 PM IST

  • प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक कैसे लग सकती है?: करणी सेना प्रमुख को जंतर-मंतर पर अनुमति न देने पर हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा

    दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर करणी सेना प्रमुख डॉ. राज शेखावत को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार करने पर दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि किसी प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक कैसे लगाई जा सकती है। पुलिस ने क्षेत्र की संवेदनशीलता और प्रदर्शन में अनुमति से अधिक लोगों के शामिल होने की आशंका का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार किया था।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शेखावत की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर हाल ही में अधिसूचित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी गई।

    शेखावत की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली पुलिस ने पहले 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी थी लेकिन 15 सितंबर को दोबारा एक पत्र जारी कर अनुमति वापस लेने की जानकारी दी गई। पुलिस के पत्र में कहा गया कि उसे आशंका है कि प्रदर्शन में अनुमति से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।

    इस पर जस्टिस शर्मा ने पुलिस से सवाल किया कि केवल इस आशंका के आधार पर ऐसा आदेश कैसे पारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पिछली सुनवाई में भी कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पुलिस प्रदर्शन पर कोई भी उचित शर्त या प्रतिबंध लगा सकती है और उसके बाद अनुमति दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी वहां कुछ घंटे ही रहेंगे और वहां से आगे नहीं जाएंगे, फिर अनुमति से इनकार कैसे किया जा सकता है।

    दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित निर्णय सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न दिशानिर्देशों और प्रदर्शन को नियंत्रित करने वाले स्थायी आदेशों को ध्यान में रखते हुए लिया गया।

    उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है और पुलिस ने केवल शेखावत को ही प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार नहीं किया है, बल्कि अन्य लोगों को भी अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रदर्शन को लेकर काफी प्रसार और प्रतिक्रिया है और कार्यपालिका को आशंका है कि स्थिति जंतर-मंतर की निर्धारित सीमा से बाहर जा सकती है।

    याचिकाकर्ता के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किसी प्रदर्शन को मिल रही पहुंच या लोगों की प्रतिक्रिया का यह मतलब नहीं है कि उतनी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास क्षेत्र में भीड़ को नियंत्रित करने के पर्याप्त साधन हैं।

    इस पर कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि क्या प्रदर्शन का स्थान बदला जा सकता है और किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है।

    जस्टिस शर्मा ने कहा कि कोर्ट केवल यह कह रहा है कि कोई उचित शर्त लगाई जाए। यदि जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं दी जा सकती तो पुलिस कोई दूसरा स्थान सुझा सकती है। कोर्ट ने पूछा कि प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक कैसे लगाई जा सकती है।

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रदर्शन का स्थान बदले जाने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने मामले को मंगलवार को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

    इससे पहले इसी महीने एकल जस्टिस ने शेखावत को 20 सितंबर को प्रदर्शन की अनुमति के लिए दिल्ली पुलिस के समक्ष नया आवेदन देने का निर्देश दिया।

    प्रस्तावित प्रदर्शन का उद्देश्य 2026 के यूजीसी विनियमों को वापस लेने की मांग करना है। शेखावत ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया है, जिसमें इन विनियमों को फिलहाल प्रभावी किए जाने पर रोक लगाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने प्रथमदृष्टया पाया कि विनियमों के कुछ प्रावधानों में अस्पष्टता है और उनके दुरुपयोग की संभावना हो सकती है।

    2026 के इन विनियमों को उच्च शिक्षा संस्थानों में 'समानता' को बढ़ावा देने और परिसरों में जाति आधारित भेदभाव से निपटने के उद्देश्य से तैयार किया गया। हालांकि, कुछ वर्गों की ओर से इनका विरोध किया गया और आरोप लगाया गया कि ये सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं।

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