हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: ओबीसी आरक्षण के नियमों में दिल्ली सरकार ने फैला दी 'पूरी अव्यवस्था'
Amir Ahmad
6 July 2026 3:13 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के नियमों को लेकर दिल्ली सरकार (GNCTD) पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अलग-अलग अधिसूचनाएं, परिपत्र और पत्र जारी कर तथा अस्पष्ट भाषा में विज्ञापन प्रकाशित करके सरकार ने पूरी व्यवस्था में अव्यवस्था पैदा की।
अदालत ने कहा कि इस स्थिति में न केवल अभ्यर्थी बल्कि अदालत के लिए भी यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि कोई उम्मीदवार आरक्षण का पात्र है या नहीं।
जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा,
"यह कहते हुए हमें खेद हो रहा है कि ओबीसी आरक्षण के मामले में दिल्ली सरकार ने एक के बाद एक अधिसूचना, परिपत्र और पत्र जारी कर तथा विज्ञापनों को अत्यंत अस्पष्ट भाषा में तैयार कर पूरी तरह अव्यवस्था पैदा की। इसका परिणाम यह है कि न केवल अभ्यर्थी बल्कि अदालत भी यह सुनिश्चित नहीं कर पाती कि किसी व्यक्ति का दावा स्वीकार किया जा सकता है या नहीं।"
अदालत ने यह भी कहा कि भर्ती विज्ञापनों में पात्रता की शर्तें स्पष्ट रूप से लिखी जानी चाहिए। केवल यह लिख देना कि समय-समय पर जारी निर्देशों और परिपत्रों के अनुसार पात्रता तय होगी, उचित नहीं है।
खंडपीठ ने कहा कि अभ्यर्थियों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे आरक्षण से संबंधित हर अधिसूचना और परिपत्र खोजने के लिए इंटरनेट खंगालते रहें। अदालत ने इस व्यवस्था को अनुचित और कानूनी रूप से अस्थिर बताया।
मामला शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी विशेष शिक्षक के पद के लिए भर्ती विज्ञापन से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने ओबीसी वर्ग के तहत आवेदन किया और उसका कहना था कि उसकी जाति दिल्ली के लिए ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल है, इसलिए वह आरक्षण का लाभ पाने का हकदार है।
हालांकि, दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSB) ने उसकी उम्मीदवारी यह कहते हुए खारिज कर दी कि उसका ओबीसी प्रमाणपत्र दिल्ली सरकार द्वारा जारी नहीं किया गया।
यह प्रमाणपत्र उसके पिता को बिहार भवन से जारी पुराने प्रमाणपत्र के आधार पर बनाया गया, जबकि भर्ती विज्ञापन में दिल्ली सरकार द्वारा जारी निर्धारित प्रकार का ओबीसी प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की जाति ओबीसी आरक्षण के लिए पात्र जरूर थी लेकिन उसका ओबीसी प्रमाणपत्र भर्ती विज्ञापन के खंड 5(4) में निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता जिन अधिसूचनाओं का हवाला दे रहा है वे केवल जाति की पात्रता से संबंधित हैं, जबकि भर्ती विज्ञापन में यह अलग से निर्धारित किया गया कि स्वीकार्य ओबीसी प्रमाणपत्र किस प्रकार का होना चाहिए।
अदालत ने कहा,
"जब याचिकाकर्ता ने बिना किसी चुनौती के उसी विज्ञापन के तहत आवेदन किया, तब वह उसकी शर्तों की अनदेखी नहीं कर सकता।"
इन टिप्पणियों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।


