ईसाई कब्रिस्तानों के लिए जमीन की ई-नीलामी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने DDA से पूछा- क्या यह कोई व्यावसायिक गतिविधि है?
Amir Ahmad
2 Sept 2026 4:55 PM IST

दिल्ली में ईसाई समुदाय के लिए कब्रिस्तान या दफन स्थलों की व्यवस्था के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को नोटिस जारी किया।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने मामले में संबंधित प्राधिकरणों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने MCD को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अपने अधिकार क्षेत्र में मौजूद ईसाई कब्रिस्तानों या दफन स्थलों की संख्या और वहां उपलब्ध जगह का पूरा विवरण देने का निर्देश दिया। अदालत ने DDA से भी यह बताने को कहा कि ईसाई समुदाय के लिए कब्रिस्तान की जरूरत के संबंध में जमीन उपलब्ध कराने की क्या स्थिति है।
अदालत का ध्यान DDA के उप निदेशक की ओर से MCD को भेजे गए एक पत्र की ओर दिलाया गया। इसमें कहा गया कि किसी निर्धारित उद्देश्य के लिए जमीन को पट्टे पर देने का आवंटन DDA पर लागू नियमों और नीतियों के अनुसार ई-नीलामी के माध्यम से किया जाता है। DDA ने इसी आधार पर याचिकाकर्ता को जमीन हासिल करने के लिए ई-नीलामी में हिस्सा लेने को कहा था।
DDA के इस रुख पर हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया असहमति जताई। अदालत ने कहा कि कब्रिस्तान के लिए जमीन की व्यवस्था को व्यावसायिक गतिविधि के बराबर नहीं माना जा सकता। खंडपीठ ने कहा कि स्थायी पट्टे पर जमीन हासिल करने के लिए नीलामी में हिस्सा लेने की शर्त उसे उचित नहीं लगती।
DDA के वकील से अदालत ने सवाल किया,
“आपने किस तरह का रुख अपनाया है? क्या यह किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि है? आपने यह क्यों कहा कि जमीन ई-नीलामी के जरिए उपलब्ध है?”
अदालत ने DDA को इस संबंध में भी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
यह जनहित याचिका लीगल क्रिश्चियंस एक्शन कमेटी के अध्यक्ष की ओर से दायर की गई। इसमें DDA को समयबद्ध तरीके से ईसाई समुदाय के लिए कब्रिस्तान की स्थापना के लिए जमीन के आवंटन या उसे निर्धारित करने पर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि जमीन उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से पूरी की जाए।
याचिका में दिल्ली में ईसाई समुदाय के लिए पर्याप्त दफन स्थलों की कमी को गंभीर समस्या बताया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार राजधानी में केवल पांच ईसाई कब्रिस्तान हैं और ये पुराने तथा ऐतिहासिक होने के साथ-साथ पूरी तरह भर चुके हैं। ऐसे में समुदाय के लोगों के सामने अपने मृत परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त और सम्मानजनक स्थान की समस्या पैदा हो गई।
याचिका में दावा किया गया कि दिल्ली में पर्याप्त दफन स्थलों के अभाव के कारण ईसाई समुदाय के परिवारों को अपने परिजनों के शवों को दफनाने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों तक ले जाना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता के मुताबिक अधिकांश परिवारों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए ऐसा करना आर्थिक रूप से बेहद कठिन है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह पिछले वर्ष जून से DDA और MCD के समक्ष इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है। कई अभ्यावेदन, पत्राचार और सूचना के अधिकार कानून के तहत आवेदन देने के बावजूद अधिकारियों की ओर से जमीन चिन्हित करने या आवंटित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता अपने पक्ष में किसी सार्वजनिक जमीन का हस्तांतरण, स्वामित्व या विशेष आवंटन नहीं मांग रहा। उसकी सीमित मांग यह है कि ईसाई समुदाय के लिए पर्याप्त सार्वजनिक दफन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिनका स्वामित्व, नियमन और संचालन सक्षम सरकारी प्राधिकरणों के पास रहे या फिर कानून के अनुसार उनकी व्यवस्था की जाए।


