छोटी कार और कम सोना लाने पर ताने देना क्रूरता की श्रेणी में आता है: दिल्ली हाईकोर्ट

Amir Ahmad

12 May 2026 1:12 PM IST

  • छोटी कार और कम सोना लाने पर ताने देना क्रूरता की श्रेणी में आता है: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज में छोटी कार लाने और अपेक्षा से कम सोना देने को लेकर पत्नी को बार-बार ताने देना प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत क्रूरता माना जा सकता है।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी मृत महिला के पिता और राज्य सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की।

    याचिकाओं में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें महिला के पति को दहेज मृत्यु और क्रूरता के आरोपों से मुक्त किया गया था।

    हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ धारा 498ए के तहत क्रूरता का आरोप बहाल कर दिया लेकिन धारा 304बी के तहत दहेज मृत्यु के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई राहत बरकरार रखी।

    मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि शादी के शुरुआती दो महीनों के बाद उनकी बेटी को दहेज को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा।

    शिकायत में कहा गया कि पति और ससुराल पक्ष यह कहकर ताने देते थे कि बड़ी कार देने का वादा किया गया था लेकिन छोटी कार के लायक ही पैसे दिए गए। साथ ही यह भी कहा जाता था कि दहेज में दिया गया सोना कम था।

    ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए पति को आरोपों से मुक्त कर दिया था कि कम सोना और छोटी कार जैसे बयान केवल ताने हैं और इन्हें धारा 498ए के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता।

    हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क से असहमति जताई। अदालत ने कहा कि यह कोई एक-दो अलग-थलग टिप्पणियां नहीं थीं बल्कि दहेज की अपेक्षाओं को लेकर मृतका को लगातार ताने दिए जाने के आरोप हैं। ऐसे आरोपों को आरोप तय करने के चरण में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने कहा,

    “शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप स्पष्ट और विशिष्ट हैं तथा सीधे पति से जुड़े हैं। बड़ी कार का वादा करने और कम सोना देने संबंधी टिप्पणियां प्रथम दृष्टया दहेज मांग से जुड़ी प्रताड़ना को दर्शाती हैं।”

    हालांकि हाईकोर्ट ने धारा 304बी के तहत दहेज मृत्यु का आरोप बहाल करने से इनकार कर दिया।

    अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्पष्ट विवरण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि महिला की मौत से ठीक पहले या उसके आसपास के समय में उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया।

    अदालत ने कहा कि दहेज मृत्यु के मामले में यह देखना जरूरी होता है कि कथित दहेज प्रताड़ना और महिला की मौत के बीच निकट संबंध है या नहीं। मौजूदा मामले में इस संबंध में पर्याप्त सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं है।

    इसी के साथ हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि पति के खिलाफ धारा 498ए के तहत आरोप तय कर कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाए।

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