बीमारी के कारण यात्रा करने में असमर्थ गवाह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए क्रॉस-एग्जामिनेशन की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

  • बीमारी के कारण यात्रा करने में असमर्थ गवाह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए क्रॉस-एग्जामिनेशन की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई गवाह बीमारी, बहुत अधिक देरी या खर्च के कारण अदालत तक यात्रा करने में असमर्थ है, तो उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए क्रॉस-एग्जामिनेशन करने की अनुमति दी जा सकती है। बशर्ते, यह प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके और इससे न्यायिक कार्यवाही की निष्पक्षता पर कोई आंच न आए।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने एक वसीयत संबंधी मामले में 71 वर्षीय गवाह से वर्चुअली क्रॉस-एग्जामिनेशन करने की अनुमति मांगने वाली अर्जी स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की।

    यह गवाह उत्तराखंड में रहती हैं और बताया गया कि वह उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। उनके डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी, जिससे उनके लिए जिरह के लिए दिल्ली आना मुश्किल हो गया।

    अदालत ने गौर किया कि यह गवाह अपनी जिरह के लिए पहले भी तीन बार दिल्ली आ चुकी हैं लेकिन हर बार जिरह नहीं हो सकी।

    पहली बार प्रतिवादी के वकील ने बीमारी का हवाला देते हुए सुनवाई टालने की मांग की। दूसरी बार, अदालत में छुट्टी थी, और तीसरी बार याचिकाकर्ता के वकील परिवार में किसी के निधन के कारण उपलब्ध नहीं थे।

    इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, क्योंकि बुजुर्ग गवाह को उत्तराखंड से दिल्ली की यात्रा करने के लिए फिर से मजबूर करना अनावश्यक परेशानी पैदा करेगा।

    साथ ही अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि क्रॉस-एग्जामिनेशन निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है और गवाह की गवाही को परखने का प्रतिवादी का अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित रहना चाहिए।

    अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस एंड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूल्स 2025' के नियम 13(8) का हवाला दिया। यह नियम अनुमति देता है कि यदि कोई व्यक्ति बीमारी या शारीरिक कमजोरी के कारण अदालत या तय जगह तक नहीं पहुंच सकता, या यदि उसे बुलाने में बहुत अधिक देरी या खर्च होगा, तो वह जहां मौजूद है, वहीं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिरह की जा सकती है।

    अदालत ने यह भी बताया कि नियम 13(9) के तहत अगर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाह की गवाही को प्रभावी ढंग से रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता, तो अदालत इस तरीके से क्रॉस-एग्जामिनेशन कराने से इनकार भी कर सकती है। हालाँकि, इस मामले में अदालत के ध्यान में ऐसी कोई बाधा नहीं लाई गई।

    अदालत ने माना कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए गवाह से क्रॉस-एग्जामिनेशन पूरी की जा सकती है, जिससे आगे होने वाली असुविधा और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा। बशर्ते, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उचित सुरक्षा उपाय किए जाएं।

    इसलिए अदालत ने आवेदन स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उत्तराखंड में तय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के ज़रिए क्रॉस-एग्जामिनेशन पूरी की जाए।

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story