'900' रुपये की रिश्वत: 35 साल पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियरों को किया बरी, सजा की रद्द

Amir Ahmad

8 April 2026 4:54 PM IST

  • 900 रुपये की रिश्वत: 35 साल पुराने मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियरों को किया बरी, सजा की रद्द

    दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 1991 के एक पुराने रिश्वत मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग के दो पूर्व इंजीनियरों को बरी कर दिया। इन पर 900-900 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था। इस फैसले के साथ ही दोनों का 35 साल लंबा कानूनी संघर्ष समाप्त हो गया।

    जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने आरोपियों की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा वर्ष 2002 में सुनाई गई सजा रद्द की। हाइकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष “अवैध धन की मांग” को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।

    अदालत ने स्पष्ट किया,

    “भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 20 के तहत अभियोजन के पक्ष में अनुमान का प्रावधान जरूर है लेकिन यह स्वतः लागू नहीं होता। पहले यह साबित करना जरूरी है कि आरोपी ने अवैध धन की मांग की और उसे स्वीकार किया।”

    मामला इस आरोप से जुड़ा था कि बाढ़ नियंत्रण विभाग में कार्यरत असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर ने एक ठेकेदार के प्रतिनिधि से लंबित बिल पास कराने के बदले 1,800 रुपये की मांग की थी। उसी दिन जाल बिछाकर कार्रवाई की गई और दोनों के पास से 900-900 रुपये बरामद होने का दावा किया गया।

    हालांकि, हाईकोर्ट को अभियोजन की कहानी में कई विरोधाभास मिले। अदालत ने पाया कि दस्तावेजी साक्ष्य, जैसे मस्टर रोल, यह दर्शाते हैं कि जिस दिन रिश्वत मांगने का आरोप है, उस दिन दोनों इंजीनियर कार्यस्थल पर मौजूद थे।

    इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि उस समय ठेकेदार के कोई भुगतान लंबित नहीं थे। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि इससे यह संदेह पैदा होता है कि रिश्वत मांगने का कोई कारण ही नहीं था।

    अदालत ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष ने महत्वपूर्ण गवाहों को पेश नहीं किया, खासकर ठेकेदार को, जो इस मामले में सबसे अहम गवाह हो सकता था।

    इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने दोनों इंजीनियरों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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