अप्रवासन संबंधी अनिश्चितता के बीच बच्चे को भारत लाने की अनुमति रद्द, पिता अमेरिका में ही मुलाकात का अधिकार इस्तेमाल करें: दिल्ली हाइकोर्ट

Amir Ahmad

20 Jun 2026 2:58 PM IST

  • अप्रवासन संबंधी अनिश्चितता के बीच बच्चे को भारत लाने की अनुमति रद्द, पिता अमेरिका में ही मुलाकात का अधिकार इस्तेमाल करें: दिल्ली हाइकोर्ट

    दिल्ली हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में फैमिली कोर्ट के उस फैसले में संशोधन कर दिया जिसमें अमेरिका में रह रहे एक नाबालिग बच्चे को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भारत लाने की अनुमति दी गई थी। हाइकोर्ट ने कहा कि बच्चे के हित और कल्याण को देखते हुए पिता को अमेरिका में ही मुलाकात और अभिरक्षा का अधिकार इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि बच्चे की अप्रवासन स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    जस्टिस तेजस करिया और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने कहा कि यदि बच्चा भारत आता है और बाद में अमेरिका लौटने में आव्रजन संबंधी किसी बाधा का सामना करता है तो यह उसके सर्वोत्तम हित में नहीं होगा।

    अदालत ने आदेश दिया,

    "प्रतिवादी पिता को अमेरिका में रहते हुए नाबालिग बच्चे से मिलने का अधिकार मिलेगा और वह ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चे की अभिरक्षा भी रख सकेंगे, लेकिन बच्चे को भारत लाने की आवश्यकता नहीं होगी।"

    मामला फैमिली कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा था जिसमें पिता को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चे को अमेरिका से भारत लाने की अनुमति दी गई थी।

    मां ने इस आदेश को हाइकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि बच्चा अमेरिका में उनके आश्रित के रूप में एफ-2 वीजा पर रह रहा है और उनकी अप्रवासन स्थिति में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि एच-1बी वित्तीय वर्ष 2027 कार्यक्रम के तहत उनके चयन के बाद वीजा स्थिति संक्रमण के दौर में है।

    मां का तर्क था कि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने से बच्चे की अप्रवासन स्थिति और अमेरिका में दोबारा प्रवेश करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    दूसरी ओर पिता ने कहा कि बच्चे के पास वैध बहु-प्रवेश बी-1/बी-2 पर्यटक वीजा भी है जिसके आधार पर वह अमेरिका वापस जा सकता है भले ही एफ-2 वीजा की वैधता समाप्त हो जाए।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाइकोर्ट ने कहा कि पारिवारिक अदालत ने मां द्वारा उठाई गई आव्रजन संबंधी चिंताओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

    अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि बच्चे की आव्रजन स्थिति सीधे तौर पर मां की स्थिति से जुड़ी हुई है। मां की पढ़ाई पूरी हो चुकी है और अब उन्होंने अमेरिका में नौकरी शुरू की है जिसके कारण उनकी वीजा स्थिति में परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है।

    पीठ ने यह भी कहा कि अमेरिकी अप्रवासन कानून विशेषज्ञ की राय अदालत पर बाध्यकारी नहीं है लेकिन उसका महत्वपूर्ण मार्गदर्शक महत्व अवश्य है।

    हाइकोर्ट ने कहा कि यदि बच्चा भारत आने के बाद किसी आव्रजन जटिलता के कारण अमेरिका वापस नहीं लौट पाता तो इससे उसके भविष्य और कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने फैमिली कोर्ट के आदेश में संशोधन किया और निर्देश दिया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान नाबालिग बच्चा अमेरिका में ही पिता के साथ रहेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था से पिता के मुलाकात और अभिरक्षा अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे तथा बच्चे के आव्रजन हितों पर भी कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

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