बेटी के भरण-पोषण का आदेश नहीं माना: दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिटेन में रह रहे व्यक्ति के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का दिया निर्देश
Amir Ahmad
2 July 2026 4:40 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के लिए दिए गए अदालत के कई आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने वाले ब्रिटेन में रह रहे एक व्यक्ति को अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही अदालत ने उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने का अनुरोध करने का निर्देश दिया।
जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि संबंधित व्यक्ति ने न्यायिक आदेशों के प्रति पूर्ण उपेक्षा दिखाई और फैमिली कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ तथा अवमानना कार्यवाही के दौरान दिए गए आदेशों का लगातार पालन नहीं किया।
अदालत ने कहा कि संबंधित व्यक्ति ने भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करने से इनकार किया और अवमानना की कार्यवाही में भी जानबूझकर पेश नहीं हुआ। ऐसे में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने और सजा का पालन कराने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है।
यह अवमानना याचिका पत्नी की ओर से दायर की गई थी। पत्नी का आरोप था कि अदालत के आदेश के बावजूद उसके पति ने अपनी नाबालिग बेटी के भरण-पोषण और कल्याण के लिए अंतरिम व्यवस्था के तहत हर महीने 1.40 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित व्यक्ति ने पहले फैमिली कोर्ट के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी थी।
हालांकि, खंडपीठ ने भुगतान की व्यवस्था में कुछ संशोधन करते हुए भी भरण-पोषण की राशि का भुगतान जारी रखने का निर्देश दिया था लेकिन इसके बावजूद उसने आदेश का पालन नहीं किया।
अदालत ने कहा कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद उसने हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया। उसका आचरण न्यायिक व्यवस्था के प्रति पूर्ण अनादर दर्शाता है और इसी कारण अदालत की अवमानना संबंधी अधिकारिता का प्रयोग करना आवश्यक हो गया।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया,
"प्रतिवादी संख्या-1 को छह महीने के साधारण कारावास और 2,000 रुपये के जुर्माने की सजा दी जाती है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में उसे सात दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।"
अदालत ने CBI को निर्देश दिया कि वह इंटरपोल के नियमों के अनुरूप संबंधित व्यक्ति का पता लगाने, उसे गिरफ्तार करने और हिरासत में लेने के उद्देश्य से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने के लिए आवश्यक अनुरोध करे। साथ ही उसकी मौजूदगी की जानकारी CBI और हाईकोर्ट को उपलब्ध कराई जाए।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने CBI को इंटरपोल के नियमों के तहत डिफ्यूजन नोटिस जारी कराने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया ताकि संबंधित व्यक्ति का पता लगाकर उसे गिरफ्तार किया जा सके।
अदालत ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को भी निर्देश दिया कि यदि संबंधित व्यक्ति भारत आता है तो वह तत्काल पुलिस और CBI को सूचना दे ताकि उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित कर अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को लागू किया जा सके।
साथ ही संबंधित अधिकारियों को उसके खिलाफ तुरंत गिरफ्तारी वारंट और कारावास वारंट जारी करने का भी निर्देश दिया गया।


