अंतरराष्ट्रीय अभिरक्षा विवाद में हेबियस कॉर्पस याचिका सुनने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार, पिता को NCPCR जाने का निर्देश
Amir Ahmad
30 April 2026 4:44 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पिता द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, जिसमें उसने अमेरिका में अपनी पूर्व पत्नी के साथ रह रहे नाबालिग पुत्र को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग की थी।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के समक्ष जाने का निर्देश दिया यह कहते हुए कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय अभिरक्षा विवादों के समाधान के लिए आयोग के पास विशेष मध्यस्थता तंत्र उपलब्ध है।
अदालत ने कहा,
“NCPCR ऐसे मामलों से व्यापक रूप से निपट रहा है, जहां बच्चों को एक अभिभावक द्वारा भारत लाया जाता है या भारत से बाहर ले जाया जाता है। इस प्रकार के विवादों के समाधान के लिए उसके पास मध्यस्थता का पूर्ण ढांचा है।”
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता और उसकी पूर्व पत्नी, दोनों विवाह के समय अमेरिकी नागरिक थे। उनका विवाह वर्ष 2003 में हुआ था और उनसे दो बच्चे हुए। बेटी अब बालिग हो चुकी है, जबकि नाबालिग पुत्र वर्ष 2018 से अमेरिका में अपनी मां के साथ रह रहा है।
पिता का आरोप है कि उसकी पूर्व पत्नी बच्चों को बिना पूर्व सूचना अमेरिका ले गई। वहीं प्रतिवादी का कहना था कि स्थानांतरण की जानकारी दी गई थी और यह दोनों पक्षों के बीच विचारित निर्णय था।
हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों को अमेरिका ले जाए जाने के लगभग आठ वर्ष बाद हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की गई। इसलिए विवादित तथ्यों का निर्धारण इस संक्षिप्त रिट कार्यवाही में संभव नहीं है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के तेजस्विनी गौड़ बनाम शेखर जगदीश प्रसाद तिवारी निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि हेबियस कॉर्पस जैसी असाधारण राहत तभी दी जानी चाहिए, जब सामान्य वैधानिक उपाय उपलब्ध न हों या अप्रभावी हों।
हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि बाल अभिरक्षा विवादों में सर्वोपरि विचार बच्चे का कल्याण होता है, जिसका समुचित मूल्यांकन संक्षिप्त रिट कार्यवाही में नहीं किया जा सकता।
अदालत ने बताया कि NCPCR का मध्यस्थता प्रकोष्ठ विशेष रूप से उन मामलों के लिए गठित है, जहां एक अभिभावक बिना दूसरे की अनुमति के बच्चे को भारत से बाहर या बाहर से भारत ले जाता है। यह प्रकोष्ठ आवश्यकता पड़ने पर बाल मनोवैज्ञानिक, विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि तथा अन्य विशेषज्ञों की सहायता भी ले सकता है।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को NCPCR के समक्ष उपयुक्त उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।

