10 साल बाद बड़ी राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मेजर जनरल को आय से अधिक संपत्ति मामले में किया बरी
Amir Ahmad
2 July 2026 2:00 PM IST

करीब एक दशक पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराए गए सेना के पूर्व मेजर जनरल आनंद कुमार कपूर को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए बरी किया। हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई आपराधिक न्याय व्यवस्था का मूल आधार है और बचाव पक्ष को प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखने का उचित अवसर न देना पूरे मुकदमे को दोषपूर्ण बना देता है।
जस्टिस जसमीत सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष CBI कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि रद्द करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोष तय करने का निष्कर्ष सरसरी या औपचारिक तरीके से नहीं निकाला जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा,
"निष्पक्ष सुनवाई की अवधारणा आपराधिक न्याय व्यवस्था के केंद्र में है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।"
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष को अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए लगभग छह महीने का समय मिला, जबकि आनंद कुमार कपूर के बचाव पक्ष को केवल तीन तारीखें ही दी गईं।
इतना ही नहीं बचाव पक्ष के साक्ष्य के लिए तय अंतिम दिन वकीलों की हड़ताल के कारण वकील अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। इसके बावजूद विशेष CBI अदालत ने सुनवाई स्थगित करने से इनकार करते हुए बचाव पक्ष के साक्ष्य बंद कर दिए। अदालत ने इसका कारण यह बताया था कि मामले के शीघ्र निस्तारण के लिए सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिए।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा,
"अपीलकर्ता की ओर से अनिश्चितकाल के लिए स्थगन नहीं बल्कि वकीलों की हड़ताल के कारण सीमित समय की ही मांग की गई।"
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि स्पेशल CBI कोर्ट ने केवल तय समयसीमा के भीतर मुकदमा समाप्त करने पर ध्यान दिया और यह नहीं देखा कि बचाव पक्ष को अतिरिक्त अवसर न देने से उसके अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
अदालत ने कहा,
"प्रक्रियागत समयसीमा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी पर हावी नहीं हो सकती। आपराधिक मुकदमे को समय के खिलाफ दौड़ में नहीं बदला जा सकता, जहां निष्पक्षता की जिम्मेदारी पीछे छूट जाए।"
मामले के तथ्यों की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करते हुए हाईकोर्ट ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष आनंद कुमार कपूर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने विभिन्न संपत्तियों का आकलन करते समय कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्यों के बजाय अनुमान और अटकलों पर भरोसा किया।
दिल्ली स्थित एक बेसमेंट संपत्ति का मूल्यांकन खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि पंजीकृत बिक्री विलेख में दर्ज राशि से अधिक भुगतान किया गया।
गोवा की एक संपत्ति के संबंध में भी अदालत ने कहा कि केवल बेटे के नाम पर संपत्ति होने के आधार पर उसे आनंद कुमार कपूर की संपत्ति नहीं माना जा सकता। जांच अधिकारी ने न तो धन के स्रोत की जांच की और न ही बेटे या विक्रेता से पूछताछ की।
अदालत ने यह भी पाया कि कुछ निवेश, नकदी और अन्य संपत्तियों को भी गलत तरीके से आनंद कुमार कपूर की संपत्ति में शामिल कर लिया गया, जबकि उपलब्ध साक्ष्यों से संकेत मिलता था कि वे उनकी मां या परिवार के अन्य सदस्यों की थीं अथवा उनके धन से खरीदी गई थीं।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष CBI अदालत का दोषसिद्धि और संपत्ति जब्त करने का आदेश रद्द करते हुए आनंद कुमार कपूर को बरी कर दिया।


