'धुरंधर' में सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दिखाने के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और CBFC को फैसला लेने का निर्देश

Amir Ahmad

20 May 2026 3:28 PM IST

  • धुरंधर में सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दिखाने के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और CBFC को फैसला लेने का निर्देश

    दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' को लेकर उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को फैसला लेने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित प्राधिकरणों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

    चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

    याचिका दीपक कुमार ने दायर की थी जो राष्ट्रीय राजधानी में सशस्त्र सीमा बल में हेड कांस्टेबल (संचार) के पद पर तैनात हैं।

    दीपक कुमार ने अदालत में स्वयं पेश होकर कहा कि फिल्म का निर्माण आधिकारिक गोपनीयता कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं किया गया। उनका आरोप था कि फिल्म के कई दृश्य सशस्त्र बलों की रणनीतिक कार्यप्रणाली को उजागर करते हैं।

    उन्होंने कहा कि फिल्म में यह दिखाया गया कि भारत के गुप्त एजेंट विदेशी देशों में किस प्रकार काम करते हैं और जीवित रहते हैं। साथ ही कुछ सफल गुप्त अभियानों के स्थान और विवरण भी दिखाए गए हैं, जिससे देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो सकता है।

    केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि दिवंगत मोहित शर्मा के माता-पिता ने भी हाइकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि फिल्म उनके बेटे के जीवन से प्रेरित है।

    हालांकि दीपक कुमार ने कहा कि उनकी चिंता अलग है। उनका कहना था कि इस तरह की फिल्मों को प्रमाणपत्र देते समय केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड खुफिया अधिकारियों से कोई सलाह-मशविरा नहीं करता।

    इस पर अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाई गई चिंताओं को पूरी तरह निराधार नहीं कहा जा सकता।

    अदालत ने टिप्पणी की,

    “फिल्म भले ही मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई गई काल्पनिक रचना हो, लेकिन उसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि किसी फिल्म में सेना की रणनीति, सुरक्षा से जुड़े तरीके और गोपनीय पहलू दिखाए जाते हैं तो इस पर विचार होना चाहिए। सेंसर बोर्ड के लिए कुछ दिशानिर्देश होने चाहिए।”

    हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और CBFC को निर्देश दिया कि वे दीपक कुमार की याचिका को एक प्रतिनिधित्व मानकर उस पर विचार करें और सूचित निर्णय लें।

    अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं तो उसकी जानकारी भी याचिकाकर्ता को दी जाए।

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