जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट का मामला: केजरीवाल, सिसोदिया समेत अन्य दिल्ली हाईकोर्ट में हुए पेश
Amir Ahmad
4 Aug 2026 4:53 PM IST

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज समेत अन्य नेताओं ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अवमानना मामले में पेश होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह मामला जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से आपत्तिजनक अभियान चलाने के आरोपों से जुड़ा है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डूडेजा की खंडपीठ ने बताया कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज को नोटिस मिल चुका है और उन्होंने कोर्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
वहीं, आम आदमी पार्टी नेता देवेश विश्वकर्मा को अभी नोटिस नहीं मिला। मामले में कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता राजदीप बेहुरा ने इसकी जानकारी दी।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादियों की ओर से पेश वकीलों ने बताया कि अवमानना संदर्भ का आधार बने दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसके बाद हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि 19 मई 2026 के आदेश के अनुसार एकत्र किए गए सभी संबंधित दस्तावेज डिजिटल माध्यम से प्रतिवादियों को उपलब्ध कराए जाएं।
देवेश विश्वकर्मा को नोटिस नहीं मिलने पर कोर्ट ने संबंधित थाना प्रभारी के माध्यम से नया नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि दिए गए पते पर वह उपलब्ध नहीं हैं तो पुलिस अधिकारी उनका वर्तमान पता पता कर नोटिस तामील कराएं। नोटिस के साथ संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जाएं।
एक अन्य अवमानना याचिका में अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, AAP नेता गोपाल राय और पत्रकार सौरव दास के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इस मामले में भी कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने की अनुमति दी।
कोर्ट ने दोनों अवमानना मामलों में जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। साथ ही याचिकाकर्ता अशोक चैतन्य को अपने आरोपों से संबंधित सामग्री एक सप्ताह के भीतर हलफनामे के साथ दाखिल करने और उसकी प्रतियां प्रतिवादियों को देने का निर्देश दिया।
यह मामला तब शुरू हुआ जब जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (णघ) की आबकारी नीति मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। बाद में उन्होंने मामले को दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दिया।
जस्टिस शर्मा ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य नेताओं द्वारा दायर किए गए पुनर्विचार (रिक्यूजल) आवेदन खारिज किए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की गई कुछ पोस्ट और वीडियो का संज्ञान लेते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू की थी।
अवमानना कार्यवाही अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, देवेश विश्वकर्मा, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ शुरू की गई।
मामले में आरोप है कि जस्टिस शर्मा के समक्ष आबकारी नीति मामले में पीठ से अलग होने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान AAP के नेताओं और एक पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जज के खिलाफ कथित रूप से गंभीर और आधारहीन आरोपों वाला कंटेंट शेयर किया।
बता दें, आबकारी नीति मामले में निचली अदालत ने 27 फरवरी को 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था, जिसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता समेत कई राजनीतिक नेता शामिल थे। इसके बाद सीबीआई ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने 9 मार्च को प्रथम दृष्टया निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों को गलत बताया। इसके बाद केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने पक्षपात की आशंका जताते हुए जस्टिस शर्मा से मामले से अलग होने की मांग की थी।
रिक्यूजल आवेदन खारिज होने के बाद केजरीवाल और सिसोदिया ने जस्टिस शर्मा को पत्र लिखकर कहा था कि वे उनके समक्ष सुनवाई में शामिल नहीं होंगे।
मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।


