ज़ीरो शुगर दावों पर उठे सवाल: कृत्रिम मिठास के स्वास्थ्य प्रभावों पर भारत-विशिष्ट अध्ययन की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और FSSAI से मांगा जवाब
Amir Ahmad
7 Aug 2026 3:38 PM IST

ज़ीरो शुगर और कृत्रिम मिठास वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की सिंगल बेंच ने यह आदेश इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
याचिका में FSSAI को निर्देश देने की मांग की गई कि वह कृत्रिम मिठास और बिना चीनी वाले मिठास प्रदान करने वाले पदार्थों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों पर भारत-विशिष्ट, स्वतंत्र और व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कराए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस अध्ययन में इन पदार्थों के चयापचय संबंधी स्वास्थ्य, हृदय रोग, कैंसर की आशंका, तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव तथा भारत के विभिन्न आयु और सामाजिक वर्गों में इनके लंबे समय तक सेवन के प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
याचिका में यह भी मांग की गई कि लंबे समय तक ऐसे उत्पादों के सेवन को लेकर आम जनता के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए और विशेष रूप से बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं, मधुमेह रोगियों तथा अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए सार्वजनिक परामर्श जारी किए जाएं।
इसके अलावा, अदालत से यह भी अनुरोध किया गया कि संबंधित प्राधिकरण यह सुनिश्चित करें कि कृत्रिम मिठास वाले उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन भ्रामक न हों। याचिका में कहा गया है कि पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी और स्पष्ट खुलासे के बिना ऐसे उत्पादों को "स्वास्थ्यवर्धक", "सुरक्षित", "डाइट" या "ज़ीरो शुगर" विकल्प के रूप में प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए।
याचिका में नियामकीय व्यवस्था को और मजबूत करने की भी मांग की गई। इसके तहत खाद्य और पेय पदार्थों के पैकेट के सामने वाले हिस्से पर स्पष्ट रूप से यह उल्लेख अनिवार्य करने का आग्रह किया गया है कि उत्पाद में कौन-सी कृत्रिम मिठास का उपयोग किया गया है। साथ ही, आवश्यक चेतावनी संदेश भी प्रमुखता से अंकित किए जाएं।
याचिका में यह भी प्रार्थना की गई कि जब तक इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन पूरा नहीं हो जाता, तब तक अंतरिम व्यवस्था के रूप में कृत्रिम मिठास वाले सभी खाद्य एवं पेय पदार्थों पर पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी और जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए, ताकि उपभोक्ता पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें।


