एम्बेसडर होटल को बेदखली नोटिस पर दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र सरकार से जवाब तलब

Amir Ahmad

9 July 2026 6:42 PM IST

  • एम्बेसडर होटल को बेदखली नोटिस पर दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र सरकार से जवाब तलब

    दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्बेसडर होटल की उस याचिका पर केंद्र सरकार और भूमि एवं विकास कार्यालय से जवाब मांगा, जिसमें सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) कानून के तहत जारी बेदखली नोटिस को चुनौती दी गई।

    जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने केंद्र सरकार और भूमि एवं विकास कार्यालय को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

    होटल की मालिक कंपनी सर सोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड की ओर से सीनियर एडवोकेट सुधीर नंदराजोग ने पक्ष रखा।

    सुनवाई के दौरान नंदराजोग ने एस्टेट अधिकारी के समक्ष चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है।

    गौरतलब है कि एस्टेट अधिकारी के समक्ष इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित है।

    याचिका में कहा गया कि एस्टेट अधिकारी बिना प्रारंभिक अधिकार क्षेत्र संबंधी आपत्तियों पर सुनवाई किए बेदखली या कोई अन्य कठोर अथवा एकपक्षीय आदेश पारित कर सकते हैं, जिससे होटल को तत्काल नुकसान होने की आशंका है।

    होटल का कहना है कि एस्टेट अधिकारी को इस मामले में सार्वजनिक परिसर कानून के तहत कार्यवाही करने का अधिकार ही नहीं है, इसलिए जारी किया गया बेदखली नोटिस कानूनन टिकाऊ नहीं है।

    याचिका के अनुसार, होटल वर्ष 1943 से संबंधित संपत्ति पर खुले, निरंतर और निर्विघ्न कब्जे में है। कंपनी का दावा है कि उसने सरकार के आमंत्रण पर सुजान सिंह पार्क का निर्माण कराया था और 8 अक्टूबर 1945 को तत्कालीन गवर्नर जनरल इन काउंसिल के साथ पंजीकृत लीज समझौते के आधार पर संपत्ति पर उसका वैध अधिकार है।

    इससे पहले होटल ने 9 जून को जिला जज, तीस हजारी अदालत द्वारा पारित उस फैसले को भी चुनौती दी थी, जिसमें वर्ष 2009 के उस आदेश को पलट दिया गया, जिसने होटल के निर्माण को वैध माना था।

    मामले के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा संपत्ति पर दोबारा कब्जा लेने के बाद कंपनी ने वर्ष 1960 में दीवानी मुकदमा दायर किया, जिसमें निचली अदालत ने कंपनी के पक्ष में फैसला दिया था।

    इसके खिलाफ केंद्र सरकार ने अपील करते हुए कहा कि लीज समझौते के तहत कंपनी को केवल आवासीय भवन बनाने की अनुमति थी लेकिन उसने शर्तों का उल्लंघन कर होटल का निर्माण कर दिया।

    अपीलीय अदालत ने अपने फैसले में माना था कि लीज समझौते की शर्तों के अनुसार केंद्र सरकार ने संपत्ति पर दोबारा कब्जा लेने का अधिकार वैध रूप से इस्तेमाल किया था।

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