'आपको अपने काम को लेकर सतर्क रहना चाहिए': दिल्ली हाईकोर्ट की अजीत भारती से मौखिक टिप्पणी, आपत्तिजनक वीडियो देखेगा कोर्ट
Amir Ahmad
16 Sept 2026 3:32 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को यूट्यूब टिप्पणीकार अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके काम और सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों को लेकर मौखिक टिप्पणी की।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि यदि भारती ने खुद को यूट्यूब टिप्पणीकार के रूप में स्थापित किया तो उन्हें अपने काम को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
कोर्ट ने मामले में कथित आपत्तिजनक वीडियो को खुद देखने के लिए सुनवाई दोपहर ढाई बजे तक टाल दी। जस्टिस बनर्जी ने कहा कि वीडियो को संदर्भ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन जब किसी मामले में विशेष कानूनी प्रावधान लागू होते हैं तो संबंधित व्यक्ति को अपनी कही गई बातों को लेकर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
जस्टिस बनर्जी ने मौखिक रूप से कहा,
“आपको पता होना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं, कहां हैं और कब हैं। अगर आप इससे अवगत नहीं हैं तो आपको वहां नहीं होना चाहिए।”
सुनवाई की शुरुआत में भारती की ओर से पेश वकील जय अनंत देहाद्राई ने कहा कि उनके मुवक्किल यूट्यूब पर राजनीतिक विषयों पर बातचीत और वीडियो प्रकाशित करते हैं और यही उनकी आय का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारती की मंशा किसी जाति का अपमान करने की नहीं थी।
मामला भारती के नाम से चलने वाले कार्यक्रम के एपिसोड से जुड़ा है, जिसे 22 अगस्त को उनके सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट और यूट्यूब पर डाला गया। आरोप है कि वीडियो में अनुसूचित जाति समुदाय, नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर जातिसूचक, अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
आरोपित टिप्पणियां सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी के जवाब में की गईं, जिसमें भारती की बहन और सांसद चंद्रशेखर आजाद के कथित विवाह का उल्लेख किया गया।
इससे पहले निचली अदालत ने भारती को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि सांसद की जाति और विवाह से जुड़ी टिप्पणियों में SC/ST Act की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध के तत्व दिखाई देते हैं।
निचली अदालत ने कहा था कि टिप्पणियों में बार-बार जाति का उल्लेख करते हुए सांसद की विवाह-योग्यता पर सवाल उठाया गया। अदालत के अनुसार, कथित टिप्पणी में यह बात सामने आई कि केवल “चमार और सांसद” होना विवाह के लिए पर्याप्त नहीं है और संबंधित सांसद को सवर्ण परिवार की लड़की से विवाह के लिए खुद को योग्य साबित करना होगा।
अदालत ने प्रथम दृष्टया माना था कि इसे महज सामान्य गाली या अलग-थलग जातिसूचक टिप्पणी नहीं माना जा सकता। उसके अनुसार, कथित भाषा में जातिगत ऊंच-नीच और विवाह के संदर्भ में जाति आधारित श्रेष्ठता की धारणा सामने आती है।
भारती ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने वीडियो में जातिसूचक टिप्पणी नहीं की थी और उनकी प्रतिक्रिया उनकी मां तथा बहन के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के जवाब में थी।
मामले में SC/ST Act की धाराओं के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(ग) और 351(3) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की गई।
दिल्ली हाईकोर्ट अब मामले में संबंधित वीडियो देखने के बाद अग्रिम जमानत याचिका पर आगे सुनवाई करेगा।


