JNU में डिप्रिवेशन प्वाइंट्स के आधार पर PG एडमिशन पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक, कहा- प्रवेश परीक्षा के अंकों से छेड़छाड़ नहीं हो सकती
Amir Ahmad
18 Aug 2026 11:32 AM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में डिप्रिवेशन प्वाइंट्स के आधार पर स्नातकोत्तर दाखिलों पर अंतरिम रोक लगाई।
जस्टिस जसमीति सिंह ने प्रथम दृष्टया कहा कि इन अंकों के जरिए यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स द्वारा साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (CUET) में प्राप्त अंकों को बदल रहा है। कोर्ट ने कहा कि प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षा की पवित्रता को इस तरह प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मामला JNU के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने यूनिवर्सिटी के ई-प्रॉस्पेक्टस की धारा V में दिए गए डिप्रिवेशन प्वाइंट्स की व्यवस्था को चुनौती दी। इस व्यवस्था के तहत उम्मीदवारों को उनकी पिछली स्कूली शिक्षा के भौगोलिक स्थान के आधार पर अधिकतम 12 डिप्रिवेशन प्वाइंट्स दिए जाते हैं। प्रत्येक एक प्वाइंट को तीन अंकों के बराबर माना जाता है।
JNU की ओर से दलील दी गई कि डिप्रिवेशन प्वाइंट्स यूनिवर्सिटी की ऐसी नीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य पर्याप्त संख्या में छात्रों को प्रवेश सुनिश्चित करना है।
जस्टिस जसमीति सिंह ने इस दलील से प्रथम दृष्टया असहमति जताते हुए कहा कि डिप्रिवेशन प्वाइंट्स के जरिए यूनिवर्सिटी उम्मीदवार द्वारा प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों में बदलाव कर रहा है और अपने स्तर पर प्रवेश के लिए अतिरिक्त अंक देने का अधिकार रखता है।
कोर्ट ने कहा,
“डिप्रिवेशन प्वाइंट्स के जरिए यूनिवर्सिटी ने छात्र द्वारा प्राप्त अंकों को बदल दिया और प्रवेश के लिए अधिकतम 12 अंक देने का अधिकार अपने पास रखा है।”
जस्टिस ने आगे कहा कि उपलब्ध प्रावधान JNU को किसी उम्मीदवार द्वारा CUET में हासिल किए गए अंकों में अतिरिक्त अंक जोड़ने की अनुमति नहीं देते। यदि किसी विश्वविद्यालय को प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षा में प्राप्त अंकों को इस तरह बदलने की अनुमति दी जाती है तो प्रवेश परीक्षा की पूरी व्यवस्था ही प्रभावित होगी।
कोर्ट ने कहा कि किसी यूनिवर्सिटी द्वारा अपने नियमों के माध्यम से प्रतिस्पर्धी परीक्षा में उम्मीदवार के प्राप्तांक बदलना प्रतिस्पर्धी परीक्षा की मूल अवधारणा के विपरीत होगा। इसी वजह से कोर्ट ने अंतरिम आदेश देना उचित माना।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक डिप्रिवेशन प्वाइंट्स के आधार पर किए जा रहे दाखिलों को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। साथ ही JNU में दाखिले के संबंध में डिप्रिवेशन प्वाइंट्स के आधार पर कोई और कदम भी नहीं उठाया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि हालांकि अंतरिम राहत के लिए कोई अलग आवेदन दाखिल नहीं किया गया लेकिन मौखिक रूप से कोर्ट से आग्रह किया गया कि यदि तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो डिप्रिवेशन प्वाइंट्स के आधार पर दाखिले पूरे हो जाएंगे और बाद में स्थिति को पलटना मुश्किल होगा।
कोर्ट ने इस आशंका को स्वीकार करते हुए कहा कि यदि बाद में यह निष्कर्ष निकलता है कि JNU उम्मीदवारों को डिप्रिवेशन प्वाइंट्स नहीं दे सकता था लेकिन तब तक दाखिले हो चुके होंगे तो ऐसी स्थिति को वापस पहले जैसा करना संभव नहीं होगा।
मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
इससे पहले सोमवार को JNU के वकील ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी की अपील की तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। खंडपीठ ने कार्यालय संबंधी आपत्तियां दूर करने के निर्देश के साथ मामले को सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी थी।


