ACP मनस्वी वशिष्ठ की वकीलों पर कथित टिप्पणी के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं तो औपचारिक याचिका दाखिल करें: दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
3 Nov 2026 12:48 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की ACP मनस्वी वशिष्ठ की कथित धमकी भरी टिप्पणियों पर स्वतः संज्ञान लेने से मंगलवार को इनकार कर दिया।
कोर्ट ने इस मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे वकीलों से औपचारिक याचिका दाखिल करने को कहा।
पीठ ने आश्वासन दिया कि याचिका दाखिल होने के बाद वह मामले पर विचार करेगी।
इस मामले का उल्लेख एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष कई वकीलों ने किया था।
पीठ में जस्टिस संजय शर्मा भी शामिल थे। वकीलों ने कथित टिप्पणियों को लेकर हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करने और कार्रवाई की मांग की।
इस पर कोर्ट ने वकीलों से उचित याचिका दाखिल करने को कहा।
पीठ ने कहा,
“कृपया औपचारिक याचिका दाखिल करें। हम इस पर विचार करेंगे और इसकी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश देंगे।”
कोर्ट ने वकीलों से यह भी कहा कि याचिका दाखिल होने के बाद उसकी एक प्रति दिल्ली पुलिस के आपराधिक मामलों के सरकारी वकील संजय लाओ को उपलब्ध कराई जाए। पीठ ने आश्वासन दिया कि वह मामले को जरूर देखेगी।
इस तरह हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह औपचारिक याचिका दाखिल होने के बाद ही इस विवाद पर विचार करेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को अनुशासन के उल्लंघन के आरोप में निलंबित किया गया। बताया गया कि वकीलों के साथ विवाद के बाद सोमवार को दिल्ली पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसका नेतृत्व एसीपी वशिष्ठ ने किया।
सोमवार सुबह करीब 100 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर 1 के बाहर जुटे थे। वे पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात की मांग कर रहे थे। उनकी मांग शाहदरा थाने में वकीलों के साथ हालिया विवाद को लेकर थी।
इससे पहले शाहदरा थाने के एसएचओ अरुण कुमार और एसीपी मनस्वी वशिष्ठ का तबादला कर दिया गया था। यह कार्रवाई वकील ललित बंसल से जुड़े मारपीट के एक मामले को संभालने के तरीके को लेकर शहर के वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद हुई थी।
विभिन्न जिला अदालतों के वकीलों ने आरोप लगाया था कि मारपीट के मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर जब वे शाहदरा थाने पहुंचे, तो एसीपी वशिष्ठ और एसएचओ अरुण कुमार ने उन्हें धमकाया। इसके विरोध में वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

