प्रधानमंत्री के साथ महिला की कथित आपत्तिजनक तस्वीर शेयर करने का आरोप, दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस सुरक्षा के आदेश दिए
Amir Ahmad
25 Sept 2026 5:15 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महिला की कथित अश्लील और आपत्तिजनक तस्वीर बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने के मामले में महिला को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया।
महिला ने आरोप लगाया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह ने कथित रूप से उसकी तस्वीर का कृत्रिम रूप से बदलाव कर उसे प्रधानमंत्री के साथ दिखाया और उसे सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद उसे धमकियां मिलने लगीं।
जस्टिस गिरिश कथ पालिया ने चारों आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए दिल्ली पुलिस को महिला की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि महिला अपना वर्तमान पता याचिका में सार्वजनिक न करके सही निर्णय लिया। हालांकि, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वह उसी दिन अदालत में मौजूद जांच अधिकारी को अपना सही पता बताए और जांच अधिकारी तत्काल उस पते को संबंधित थाना प्रभारी तक पहुंचाए।
कोर्ट ने थाना प्रभारी को महिला को हर संभव और व्यावहारिक तरीके से पूरी पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
अदालत ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को भी नोटिस जारी किया और उसके द्वारा संचालित सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से कथित आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया।
महिला की ओर से पेश वकील उमेश शर्मा ने कहा कि उसकी अनुमति के बिना अज्ञात लोगों ने उसकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें अत्यंत अश्लील और आपत्तिजनक तरीके से प्रधानमंत्री के साथ दिखाया।
आरोप है कि इन तस्वीरों को कॉकरोच जनता पार्टी के हाल में आयोजित प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक और अपमानजनक नारों के साथ प्रदर्शित किया गया और बाद में सोशल मीडिया पर शेयर किया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित चेहरा बदलने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर महिला का चेहरा एक अत्यंत आपत्तिजनक तस्वीर पर लगाया। इसके बाद कथित तौर पर इस तस्वीर के बैनर बनाकर प्रदर्शन में प्रदर्शित किए गए और इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर डाले गए।
महिला का आरोप है कि उसकी तस्वीरों का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना किया गया और उन्हें विभिन्न अश्लील वेबसाइटों पर भी प्रसारित किया गया। उसने दावा किया कि इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद उसे लगातार जान से मारने और दुष्कर्म की धमकियां मिल रही हैं।
सुनवाई के दौरान महिला के वकील ने कहा कि FIR दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने अब तक सामग्री हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने अदालत से पूरी सामग्री तत्काल हटाने का निर्देश देने की मांग की।
अदालत ने कहा कि सामग्री हटाने से संबंधित राहत का मामला दीवानी क्षेत्र की पीठ के समक्ष जाना चाहिए। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए
अदालत ने कहा कि महिला को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और फिलहाल उसे पुलिस सुरक्षा दी जा सकती है।
कोर्ट ने कहा,
“महिला की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। याचिका में उसका पता सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। वह अपना पता थाना प्रभारी को बताएगी और थाना प्रभारी उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।”
अदालत ने दिल्ली पुलिस को एक सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा। साथ ही, रजिस्ट्री को याचिका और उसके साथ दाखिल दस्तावेजों से संबंधित आपत्तिजनक वेब लिंक हटाने और उन्हें सार्वजनिक रिकॉर्ड में उजागर न करने का निर्देश दिया गया।
हालांकि, कोर्ट ने महिला को निर्देश दिया कि वह संबंधित तस्वीरें और वीडियो इलेक्ट्रॉनिक रूप में वेब लिंक के साथ जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए, ताकि मामले की जांच आगे बढ़ाई जा सके।
महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उसके खिलाफ सुनियोजित साइबर हमला किया गया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से उसकी पहचान और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। उसने पुलिस को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सोशल मीडिया और अन्य वेबसाइटों से कथित आपत्तिजनक तस्वीरों और वीडियो को खोजकर हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की।
कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला को प्रदर्शन के आयोजकों से मुआवजा मांगने का अधिकार है और याचिका दायर करने से कानून के तहत उपलब्ध किसी अन्य राहत का दावा करने पर रोक नहीं लगेगी।
अदालत ने कहा कि FIR पहले ही दर्ज हो चुकी है और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील ने कार्रवाई जल्द से जल्द किए जाने का आश्वासन दिया।

