दिल्ली हाइकोर्ट ने सर्दी में खुले में सोने को मजबूर लोगों के लिए AIIMS को दान देने की अपील की
Amir Ahmad
16 Jan 2026 1:03 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाइकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के वकीलों से अपील की कि वे AIIMS को दान देने के लिए आगे आएं ताकि सर्दी के मौसम में अस्पताल परिसर के बाहर खुले में सोने को मजबूर मरीजों, उनके तीमारदारों और परिजनों के लिए उचित आश्रय की व्यवस्था की जा सके।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि वकीलों को इस दिशा में सक्रिय किया जाना चाहिए और AIIMS के लिए कुछ धनराशि एकत्र की जानी चाहिए।
यह टिप्पणी तब की गई जब AIIMS की ओर से पेश वकील सत्य रंजन स्वैन ने अदालत को बताया कि अस्पताल ने दीर्घकालिक समाधान के तौर पर दो एकड़ भूमि पर 3,000 बिस्तरों वाला “विश्राम सदन” (नाइट शेल्टर) बनाने का प्रस्ताव रखा है।
यह जानने पर कि AIIMS दान स्वीकार करता है, अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से कहा कि DHCBA के सदस्यों को सक्रिय किया जाए ताकि कुछ धन एकत्र कर AIIMS को दान दिया जा सके।
अदालत ने कहा कि इसके लिए किसी औपचारिक आदेश की आवश्यकता नहीं है।
इस पर ASG चेतन शर्मा ने अदालत को आश्वस्त किया कि बार इस अनुरोध को जिम्मेदारी से लेगी और इस नेक कार्य के लिए पहला दान स्वयं उनकी ओर से दिया जाएगा। कुछ ही देर में DHCBA के अध्यक्ष सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन भी वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में शामिल हुए।
चीफ जस्टिस ने हरिहरन को बताया कि AIIMS 3,000 बिस्तरों वाला विश्राम सदन बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जिसमें बड़ी राशि की आवश्यकता होगी। इसके लिए DHCBA से अपेक्षा की गई कि वह अपने सदस्यों को प्रेरित कर दान एकत्र करे और AIIMS को सहयोग दे।
इस पर DHCBA अध्यक्ष ने कहा कि अदालत का अनुरोध उनके लिए आदेश के समान है और बार इस दिशा में कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी DHCBA ने पंजाब में आई बाढ़ के दौरान इसी तरह का सहयोग किया था।
इस मामले में अदालत ने हाल ही में दक्षिण जिला के प्रधान जिला एवं सेशन जज की अध्यक्षता में विभिन्न सरकारी एजेंसियों और अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक कराने का निर्देश दिया ताकि ठंड से निपटने के लिए तात्कालिक योजना बनाई जा सके।
शुक्रवार की सुनवाई में एएसजी शर्मा ने बताया कि इस बैठक में तीन घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई और इसके बाद 70 पगोडा टेंट लगाए गए, सबवे को साफ कर वहां शरण की व्यवस्था की गई और पिछले दो दिनों में यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी व्यक्ति ठंड से प्रभावित न रहे।
अदालत ने बैठक की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए संतोष व्यक्त किया और कहा कि सभी सरकारी एजेंसियों ने सहयोग किया है।
AIIMS द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि 3,000 बिस्तरों वाला यह विश्राम सदन बेघर लोगों, मरीजों और उनके परिजनों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और इसे न्यूनतम समय में पूरा किया जाना चाहिए।
अदालत ने AIIMS प्रशासन, विशेष रूप से अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) के प्रयासों की सराहना की और निर्देश दिया कि सभी संबंधित एजेंसियां इस परियोजना में पूरा सहयोग करें।
साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कहीं नाइट शेल्टर में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे तुरंत दूर किया जाए।
हाइकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 24 जनवरी को प्रधान जिला एवं सेशन जज की अध्यक्षता में फिर से बैठक की जाए, जिसमें सभी संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हों।
मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।
इससे पहले भी अदालत ने स्पष्ट किया था कि ठंड के मौसम में बेघर लोगों को आश्रय देने की जिम्मेदारी से दिल्ली सरकार और उसकी एजेंसियां बच नहीं सकतीं।
अदालत ने अस्पतालों के आसपास उपलब्ध स्थानों पर तुरंत टेंट और पंडाल लगाने तथा सबवे में पर्याप्त बिस्तरों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।
यह पूरा मामला एक समाचार रिपोर्ट के संज्ञान के बाद सामने आया था, जिसमें अस्पतालों के बाहर सर्दी में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर मरीजों और उनके परिजनों की दयनीय स्थिति का जिक्र किया गया था।

