CBSE की नई मूल्यांकन प्रणाली पर उठे सवाल: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और बोर्ड से मांगा जवाब
Amir Ahmad
8 Jun 2026 6:31 PM IST

CBSE की कक्षा 12 की परीक्षाओं में लागू की गई नई ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे विवाद पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और CBSE को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और तकनीकी खामियों का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई।
सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से पेश एडवोकेट एम. ए. नियाज़ी ने याचिका की स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि याचिका एक राजनीतिक संगठन की छात्र इकाई द्वारा दायर की गई और शिक्षा को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
उन्होंने अदालत से कहा,
"हम नहीं चाहते कि शिक्षा का राजनीतिकरण हो।"
इसके जवाब में NSUI की ओर से पेश वकील ने कहा कि किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव होना याचिका दायर करने के अधिकार को समाप्त नहीं करता, खासकर तब जब मामला लाखों छात्रों के हितों से जुड़ा हो।
CBSE ने यह भी कहा कि शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया जारी है और सत्यापन पोर्टल को अनिश्चितकाल तक खुला नहीं रखा जा सकता।
याचिका में कहा गया कि ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से जांचा गया था।
हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद देशभर से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने धुंधले स्कैन, पन्नों के गायब होने, अधूरी अपलोडिंग, उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान में गड़बड़ी, अपेक्षा से कम अंक मिलने और प्रभावी पुनः जांच व्यवस्था के अभाव जैसी शिकायतें उठाईं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की मांग किया जाना इस प्रक्रिया को लेकर गहरी चिंता और अविश्वास को दर्शाता है।
याचिका में दावा किया गया कि मौजूदा शिकायत निवारण व्यवस्था पर्याप्त नहीं है और स्टूडेंट को केवल सीमित डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराए गए।
NSUI ने अदालत से मांग की कि उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन के लिए पोर्टल को एक महीने के लिए दोबारा खोला जाए तथा विवादित मामलों में मैनुअल पुनर्मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन की अनुमति दी जाए।
याचिका में केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की गई ताकि भविष्य में डिजिटल मूल्यांकन प्रणालियों के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय और स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार किए जा सकें।
हाईकोर्ट ने फिलहाल केंद्र सरकार के शिक्षा विभाग और CBSE से जवाब मांगा।
मामले की अगली सुनवाई 12 जून को होगी।

