CBSE की 12वीं की अकाउंटेंसी और गणित परीक्षा में कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति देने की मांग वाली PIL पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

  • CBSE की 12वीं की अकाउंटेंसी और गणित परीक्षा में कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति देने की मांग वाली PIL पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

    दिल्ली हाईकोर्ट ने CBSE की 12वीं कक्षा की अकाउंटेंसी और गणित परीक्षाओं में कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।

    एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तथा PARAKH (राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र) से जवाब मांगा।

    CBSE की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि यह मुद्दा विचाराधीन है और निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।

    याचिका में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए कैलकुलेटर इस्तेमाल की मौजूदा सुविधा का विस्तार करने की मांग की गई। फिलहाल यह सुविधा डिस्कैल्कुलिया से पीड़ित विद्यार्थियों को उपलब्ध है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसे दिव्यांग विद्यार्थियों की अन्य श्रेणियों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए।

    याचिका में CBSE द्वारा कैलकुलेटर इस्तेमाल पर लगातार लगाए गए प्रतिबंध को मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया गया। याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से कहा कि CBSE की अपनी पाठ्यक्रम समिति ने नवंबर 2024 में 12वीं की अकाउंटेंसी परीक्षा में बुनियादी कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

    याचिका के अनुसार, दिसंबर 2024 में यह प्रस्ताव CBSE की गवर्निंग बॉडी के समक्ष रखा गया था, लेकिन अब तक इसे अधिसूचित या लागू नहीं किया गया।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि परीक्षा में लंबी गणनाओं के कारण काफी समय खर्च हो जाता है। इससे विद्यार्थियों को अकाउंटेंसी और गणित जैसे विषयों में अपनी अवधारणात्मक समझ प्रदर्शित करने के लिए कम समय मिलता है।

    याचिका में CBSE को गणित की परीक्षाओं में कैलकुलेटर इस्तेमाल की अनुमति देने के मुद्दे पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग भी की गई। इसके अलावा, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध मौजूदा सुविधा को केवल डिस्कैल्कुलिया से पीड़ित विद्यार्थियों तक सीमित न रखकर अन्य दिव्यांग श्रेणियों तक बढ़ाने की मांग की गई।

    याचिका में कहा गया कि 17 अगस्त को इस प्रस्ताव को लागू करने और इस संबंध में कारणों सहित जवाब देने की मांग करते हुए प्रतिवेदन दिया गया, लेकिन उस पर अब तक कोई जवाब नहीं मिला।


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