दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बार-बार CAPF की तैनाती पर आशीष जोशी पहुंचे हाईकोर्ट, सरकार से मांगा आदेशों और कारणों का ब्योरा
Amir Ahmad
30 Oct 2026 4:28 PM IST

पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी ड्यूटी के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की बार-बार तैनाती और उसकी अवधि बढ़ाए जाने के फैसलों की न्यायिक समीक्षा की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
याचिका में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई कि वे बलों की तैनाती से संबंधित मांग-पत्र, मंजूरी और अवधि बढ़ाने के आदेश अदालत के रिकॉर्ड पर रखें। इसमें 6 अक्टूबर, 8 अक्टूबर, 22 अक्टूबर और 29 अक्टूबर को लिए गए फैसलों से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए।
याचिकाकर्ता ने शुरुआत में तैनात की गई CAPF की 273 कंपनियों और बाद में घटाकर 270 की गई कंपनियों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगr। इसमें प्रत्येक कंपनी की स्वीकृत संख्या, दिल्ली भेजे गए जवानों की संख्या, वास्तव में ड्यूटी पर रिपोर्ट करने वाले जवानों की संख्या और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी ड्यूटी में लगाए गए कर्मियों का ब्योरा शामिल है।
याचिका में बल के अनुसार और तारीखवार तैनाती का विवरण देने की भी मांग की गई। इसके साथ ही यह बताने को कहा गया कि कितने जवान रिजर्व में रखे गए और बलों की संख्या घटाने या उन्हें वापस बुलाने के लिए किन मानदंडों का इस्तेमाल किया गया।
जोशी ने तैनाती और उसकी अवधि बढ़ाने के फैसलों के आधार में मौजूद तत्कालीन जोखिम आकलन और सिफारिशों को भी सार्वजनिक करने की मांग की। अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया कि किस तरह के खतरे की आशंका थी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा के वास्तविक खतरे के बीच अंतर कैसे किया गया तथा बलों की तैनाती के बजाय कम प्रतिबंधात्मक विकल्पों पर विचार किया गया या नहीं।
याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि 16 नवंबर के बाद CAPF की तैनाती जारी रखने की अनुमति केवल लिखित और कारणयुक्त आदेश के जरिए दी जाए। ऐसे आदेश में तैनाती की आवश्यकता, बलों की संख्या, उनका भौगोलिक विस्तार, विचार किए गए वैकल्पिक उपाय और अगली समीक्षा की तारीख दर्ज होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह घोषणा करने की भी मांग की कि नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सीएपीएफ की तैनाती का आदेश अपने आप में शांतिपूर्ण सभाओं को तितर-बितर करने, केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को हिरासत में लेने या बल प्रयोग करने की अनुमति नहीं देता।
याचिका में कहा गया कि किसी भी दमनात्मक कार्रवाई को लागू कानूनों और संवैधानिक कसौटियों का स्वतंत्र रूप से पालन करना होगा। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 148 से 151 के साथ आवश्यकता, आनुपातिकता और जवाबदेही के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लेख किया गया
जोशी ने केंद्र सरकार को अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर आठ सप्ताह के भीतर एक लिखित प्रोटोकॉल तैयार करने और अधिसूचित करने का निर्देश देने की मांग भी की। यह प्रोटोकॉल विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी व्यापक स्तर की या बार-बार अवधि बढ़ाई जाने वाली सीएपीएफ तैनाती के लिए होना चाहिए।
इसके अलावा याचिका में अक्टूबर 2026 की तैनाती से संबंधित सभी आदेशों, अवधि बढ़ाने के फैसलों, मांग-पत्रों, बलों की संख्या के रिकॉर्ड, समीक्षा टिप्पणियों, समन्वय संबंधी निर्देशों, खर्च के दस्तावेजों और घटनाओं के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। यह मांग सुप्रीम कोर्ट की ओर से पहले ही जारी किए गए रिकॉर्ड संरक्षण संबंधी निर्देशों को प्रभावित किए बिना की गई।

