AI से वॉइस नकल का दावा, दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित वसूली कॉल की फॉरेंसिक जांच का आदेश दिया
Amir Ahmad
29 Sept 2026 4:35 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित वसूली के लिए की गई फोन कॉल की रिकॉर्डिंग की वैज्ञानिक जांच कराने का निर्देश दिया। आरोपी पक्ष ने दावा किया था कि रिकॉर्डिंग में सुनाई दे रही वॉइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार की गई आवाज की नकल हो सकती है।
जस्टिस तुषार राव गेडेला ने रियल एस्टेट कंपनी BPTP लिमिटेड की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए रिकॉर्डिंग को केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब भेजने का निर्देश दिया।
BPTP की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव नायर ने अदालत को बताया कि प्रतिवादी नितिन नरेश ने कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि जय शंकर को फोन किया। कंपनी का आरोप है कि बातचीत में पैसे की मांग कर कथित तौर पर वसूली का प्रयास किया गया और यह अदालत के 3 सितंबर के पूर्व आदेश का उल्लंघन है।
कंपनी की ओर से अदालत में करीब 12 मिनट लंबी फोन रिकॉर्डिंग भी सुनाई गई और पूर्व आदेश की कथित अवहेलना के लिए प्रतिवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
हालांकि, नरेश ने ऐसी किसी बातचीत से इनकार किया। उनका कहना था कि रिकॉर्डिंग में उनकी आवाज की AI के जरिए नकल तैयार की गई हो सकती है और आवाज में बदलाव किया गया हो सकता है।
उन्होंने यह भी दलील दी कि रिकॉर्डिंग के साथ भारतीय साक्ष्य संबंधी आवश्यक प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया और ऐसे प्रमाणपत्र के बिना रिकॉर्डिंग को साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने रिकॉर्डिंग की वास्तविकता का पता लगाने के लिए उसे फॉरेंसिक लैब भेजने का अनुरोध किया।
अदालत ने कहा कि लगाए गए आरोपों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रिकॉर्डिंग की सत्यता और वास्तविकता का पता लगाना जरूरी है।
अदालत ने कहा,
“इन आरोपों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रिकॉर्डिंग की सत्यता और वास्तविकता का पता लगाना उचित होगा।”
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि रिकॉर्डिंग को पेन ड्राइव में स्थानांतरित कर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सौंपा जाए। रजिस्ट्रार जनरल इसे सीलबंद कर केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) मुख्यालय को भेजेंगे।
अदालत ने केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब के निदेशक से जांच को प्राथमिकता देते हुए चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तैयार कर रजिस्ट्रार जनरल को सौंपने का अनुरोध किया। रिपोर्ट मिलने के बाद उसे सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष रखा जाएगा।
सुनवाई के दौरान नरेश ने स्वेच्छा से अदालत के समक्ष यह भी कहा कि उनके खिलाफ विषय से संबंधित बयान देने पर रोक लगाई जा सकती है। अदालत ने इस बयान को स्वीकार करते हुए उन्हें अगली सुनवाई तक मामले के विषय पर सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से रोक दिया।
मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

