पदोन्नति के लिए सेवा अवधि नियुक्ति की तारीख से नहीं, संबंधित कैलेंडर वर्ष से गिनी जाएगी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

Amir Ahmad

8 Sept 2026 12:57 PM IST

  • पदोन्नति के लिए सेवा अवधि नियुक्ति की तारीख से नहीं, संबंधित कैलेंडर वर्ष से गिनी जाएगी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि की गणना को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पात्रता सेवा की गणना संबंधित संवर्ग में नियुक्ति की वास्तविक तारीख से नहीं, बल्कि उस कैलेंडर वर्ष से की जाएगी, जिसमें कर्मचारी ने पदोन्नति के लिए निर्धारित मूल संवर्ग में प्रवेश किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) में सेवा अवधि की गणना के लिए कैलेंडर वर्ष को आधार बनाया गया।

    चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए सिंगल बेंच का आदेश रद्द किया और अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के पदोन्नति के मामलों पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता 1 जनवरी 2025 को पदोन्नति के लिए आठ वर्ष की आवश्यक सेवा पूरी कर चुके थे।

    मामला पुलिस विभाग में उप निरीक्षक (रेडियो) के पद पर कार्यरत कर्मचारियों से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति नवंबर 2017 में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के बाद हुई। उनकी सेवा छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिका (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2021 के तहत संचालित होती है। इन नियमों के अनुसार निरीक्षक (रेडियो) के पद पर पदोन्नति के लिए आठ वर्ष की सेवा आवश्यक है।

    याचिकाकर्ताओं का कहना था कि छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) के तहत सेवा अवधि की गणना नियुक्ति की वास्तविक तारीख से नहीं, बल्कि उस कैलेंडर वर्ष से की जानी है, जिसमें कर्मचारी ने मूल संवर्ग में नियुक्ति पाई। इस आधार पर उनका दावा था कि उन्होंने वर्ष 2024 में आठ वर्ष की सेवा पूरी कर ली और 1 जनवरी 2025 से पदोन्नति के लिए पात्र हो गए।

    याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि निरीक्षक (रेडियो) के सात पद खाली थे और वरिष्ठता सूची में उनका स्थान भी ऊपर था। इसके बावजूद विभाग ने उनकी पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक नहीं बुलाई, जबकि अन्य अधिकारियों के मामलों में ऐसी बैठक की गई। उनके अभ्यावेदनों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच का रुख किया। सिंगल बेंच ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि नवंबर 2017 में नियुक्ति होने के कारण वे आठ वर्ष की सेवा अक्टूबर 2025 में पूरी करेंगे और 1 जनवरी 2026 से पदोन्नति के लिए पात्र होंगे। इसके खिलाफ उन्होंने खंडपीठ में अपील की।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि 2003 के नियमों का नियम 6(2) साफ तौर पर कहता है कि पात्रता सेवा की गणना उस कैलेंडर वर्ष से होगी, जिसमें कर्मचारी ने मूल संवर्ग में प्रवेश किया। विभागीय दिशा-निर्देश या कार्यप्रणाली संबंधी कोई आदेश इस वैधानिक प्रावधान को निष्प्रभावी नहीं कर सकता।

    दूसरी ओर, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि 1 जनवरी 2025 की निर्धारित तारीख तक याचिकाकर्ताओं ने वास्तविक रूप से केवल करीब सात वर्ष एक महीने की सेवा पूरी की थी। इसलिए वे आठ वर्ष की सेवा की शर्त पूरी नहीं करते थे। राज्य ने 2021 के नियमों के नियम 16 का हवाला देते हुए कहा कि विभागीय पदोन्नति समिति को संबंधित वर्ष के 1 जनवरी को निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों के मामलों पर ही विचार करना होता है।

    राज्य ने यह भी कहा कि केवल पद खाली होने से किसी कर्मचारी को पदोन्नति का अधिकार नहीं मिल जाता। कर्मचारी को पहले निर्धारित पात्रता पूरी करनी होती है।

    खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए नियम 6(2) के प्रावधान को निर्णायक माना। अदालत ने कहा कि इस नियम में स्पष्ट रूप से कहा गया कि 1 जनवरी को पात्रता सेवा की गणना उस कैलेंडर वर्ष से की जाएगी, जिसमें सरकारी कर्मचारी ने मूल संवर्ग में प्रवेश किया, न कि उसकी नियुक्ति की वास्तविक तारीख से।

    अदालत ने कहा कि नियम बनाने वाले प्राधिकारी ने जानबूझकर कैलेंडर वर्ष को गणना का आधार बनाया और नियुक्ति की वास्तविक तारीख को आधार नहीं माना है। इसलिए याचिकाकर्ताओं के लिए वर्ष 2017 को सेवा का पहला वर्ष माना जाएगा। इस हिसाब से उन्होंने वर्ष 2024 में आठ वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी और 1 जनवरी 2025 को पदोन्नति के लिए पात्र थे।

    खंडपीठ ने माना कि सिंगल बेंच ने वास्तविक नियुक्ति तारीख को आधार बनाकर सेवा अवधि की गणना करने में गलती की। अदालत ने कहा कि 2021 के नियमों का नियम 16 भी पात्रता को संबंधित वर्ष की 1 जनवरी की स्थिति के आधार पर जांचने की बात करता है।

    अदालत ने राज्य की यह दलील भी खारिज की कि याचिकाकर्ताओं ने वास्तविक रूप से केवल सात वर्ष एक महीने की सेवा पूरी की थी। खंडपीठ ने कहा कि वैधानिक नियम में सेवा अवधि की गणना का तरीका स्पष्ट रूप से निर्धारित है और उसी के अनुसार पात्रता तय की जानी होगी।

    इसके साथ ही खंडपीठ ने एकल पीठ का आदेश रद्द करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के पदोन्नति के मामलों पर इस आधार पर विचार किया जाए कि उन्होंने 1 जनवरी 2025 तक आठ वर्ष की आवश्यक सेवा पूरी कर ली थी।

    इस आदेश के साथ खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की अपील स्वीकार की।

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