योग्यता-आधारित पदोन्नति में सीनियरिटी का यांत्रिक उपयोग गलत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला

Amir Ahmad

10 April 2026 1:32 PM IST

  • योग्यता-आधारित पदोन्नति में सीनियरिटी का यांत्रिक उपयोग गलत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि “मेरिट-कम-सीनियरिटी” यानी योग्यता-सह-वरिष्ठता के सिद्धांत में पहले उम्मीदवारों की योग्यता का तुलनात्मक मूल्यांकन करना अनिवार्य है। केवल सीनियरिटी के आधार पर पदोन्नति देना कानून के विरुद्ध है।

    चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि सीनियरिटी का उपयोग केवल तब किया जा सकता है, जब उम्मीदवारों की योग्यता वास्तव में बराबर पाई जाए, न कि बिना उचित मूल्यांकन के।

    मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार अपीलकर्ता वर्ष 1994 में जेल अधीक्षक के पद पर नियुक्त हुआ था और वर्ष 2000 में कैडर में शामिल किया गया। वहीं, प्रतिवादी वर्ष 2009 में सेवा में आया। वर्ष 2023 में उप महानिरीक्षक (DIG) जेल के पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक हुई।

    DPC ने बहुत अच्छा वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) के आधार पर दोनों को योग्य मानते हुए अपीलकर्ता को पदोन्नति के लिए चुन लिया। बाद में प्रतिवादी ने सूचना के अधिकार कानून के तहत DPC की कार्यवाही और एसीआर विवरण प्राप्त कर यह दावा किया कि उसकी प्रविष्टियां अधिक उत्कृष्ट थीं।

    प्रतिवादी की आपत्ति यह कहकर खारिज कर दी गई कि रिक्ति उपलब्ध नहीं है, जबकि अपीलकर्ता को पदोन्नति मिल चुकी थी। इसके बाद प्रतिवादी ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे एकल पीठ ने स्वीकार करते हुए पदोन्नति आदेश रद्द कर दिया।

    खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि DPC ने सभी उम्मीदवारों को केवल समान ग्रेडिंग के आधार पर बराबर मान लिया और उनकी योग्यता का तुलनात्मक मूल्यांकन नहीं किया। इसके बाद केवल सीनियरिटी के आधार पर चयन किया गया जो कि नियमों का उल्लंघन है।

    अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि योग्यता प्रमुख आधार होना चाहिए और सीनियरिटी केवल टाई-ब्रेकर के रूप में ही लागू हो सकती है।

    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि DPC द्वारा योग्यता का समुचित आकलन न करना पदोन्नति प्रक्रिया को मनमाना और अवैध बनाता है।

    इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एकल पीठ का फैसला बरकरार रखते हुए अपील खारिज की।

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