समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच स्थानांतरण पदोन्नति नहीं, मैकप लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
Amir Ahmad
9 Jan 2026 6:59 PM IST

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच किया गया स्थानांतरण पदोन्नति नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे पार्श्व नियुक्ति माना जाएगा। ऐसे स्थानांतरण को संशोधित आश्वस्त कैरियर प्रगति योजना के तहत मिलने वाले सीमित वित्तीय उन्नयन के विरुद्ध नहीं गिना जा सकता।
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने यह फैसला केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए दिया। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का आदेश बरकरार रखा, जिसमें रेलवे कर्मचारियों को मैकप योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय उन्नयन देने का निर्देश दिया गया।
मामले के अनुसार, संबंधित कर्मचारी वर्ष 1995 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में सहायक लोको पायलट के पद पर नियुक्त हुए। इसके बाद उन्हें सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट और फिर लोको पायलट (मालगाड़ी) के पद पर पदोन्नत किया गया, जिसमें चार हजार दो सौ रुपये का ग्रेड पे था। सेवा में ठहराव को दूर करने के उद्देश्य से लागू मैकप योजना के तहत रेलवे प्रशासन ने वर्ष 2016 में उन्हें पहला वित्तीय उन्नयन प्रदान किया।
इसके बाद कर्मचारियों ने मैकप योजना के अंतर्गत एक और वित्तीय उन्नयन की मांग की, जिसे रेलवे प्रशासन ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे पहले ही अपने करियर में दो पदोन्नतियों का लाभ ले चुके हैं। इस निर्णय को कर्मचारियों ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी, जहां उनकी याचिका स्वीकार कर ली गई।
रेलवे प्रशासन ने अधिकरण के आदेश के खिलाफ हाइकोर्ट का रुख किया और तर्क दिया कि मैकप योजना पदोन्नति पदानुक्रम नहीं बल्कि ग्रेड पे पदानुक्रम पर आधारित है। प्रशासन का कहना था कि कर्मचारियों को पहले ही समान ग्रेड पे में दो बार पदोन्नति मिल चुकी है, इसलिए वे आगे के मैकप लाभ के पात्र नहीं हैं।
हाइकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि कर्मचारियों का ग्रेड पे चार हजार दो सौ रुपये पर स्थिर रहा और इस दौरान हुए पद परिवर्तन को पदोन्नति नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि समान ग्रेड पे वाले पदों के बीच परिवर्तन मात्र पार्श्व स्थानांतरण है, जिससे न तो कोई अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलता है और न ही पदानुक्रम में कोई वास्तविक वृद्धि होती है।
अदालत ने यह भी कहा कि रेलवे प्रशासन यह साबित करने में असफल रहा कि ऐसे स्थानांतरण को सेवा नियमों के तहत कार्यात्मक पदोन्नति माना जाता है। जब तक ग्रेड पे या पदानुक्रम में वास्तविक वृद्धि न हो, तब तक ऐसे बदलाव को मैकप योजना के तहत पदोन्नति नहीं माना जा सकता।
इन सभी तथ्यों के आधार पर हाइकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को सही ठहराया और कर्मचारियों को मैकप योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय उन्नयन देने के निर्देश को बरकरार रखा। परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।

