बच्चों की करंट से मौत के मामलों पर राज्य की कार्रवाई के बाद स्वतः संज्ञान जनहित याचिका बंद: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
Amir Ahmad
9 March 2026 2:27 PM IST

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने बच्चों की करंट लगने से हुई मौतों से जुड़े मामलों पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका को राज्य सरकार की प्रभावी कार्रवाई के बाद अभिलेखों में दर्ज करते हुए बंद किया।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह स्वतः संज्ञान जनहित याचिका वर्ष 2025 में दो चिंताजनक समाचारों के आधार पर शुरू की थी जिनमें बच्चों की करंट लगने से मौत की घटनाएं सामने आईं।
पहला मामला कोंडागांव जिले का है, जहां ढाई साल के एक बच्चे की आंगनवाड़ी केंद्र के अंदर खुले बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत हो गई। बताया गया कि बच्चा केंद्र के अंदर खेलते समय अचानक करंट लगने से गिर पड़ा।
समाचार में यह भी उल्लेख था कि आंगनवाड़ी केंद्र में खुले तार, खराब स्विच और असुरक्षित बिजली फिटिंग को लेकर कई बार शिकायत की गई लेकिन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
इस पर अदालत ने कहा कि समाचार रिपोर्ट से आंगनवाड़ी केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों की बेहद चिंताजनक स्थिति सामने आती है। अदालत ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के लिए बनाए गए और माता-पिता भरोसे के साथ अपने बच्चों को वहां छोड़ते हैं कि उनकी ठीक से देखभाल होगी।
राज्य के मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि संबंधित आंगनवाड़ी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई। साथ ही राज्यभर के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में बिजली व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए गए और मृतक बच्चे के परिवार को एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई।
दूसरा मामला करगीकला गांव का था जहां छह साल के बच्चे की खेत में खेलते समय बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत हो गई। जांच में सामने आया कि खेत के मालिक ने फसल की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली से जुड़ी झटका मशीन और तार वाली बाड़ लगाई।
मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत FIR दर्ज की गई। साथ ही मृतक बच्चे की मां को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई।
सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने कहा कि खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली के तार लगाने और पानी में करंट छोड़कर अवैध मछली पकड़ने जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इससे न केवल लोगों की बल्कि मवेशियों और वन्यजीवों की भी जान जा रही है।
अदालत ने यह भी कहा कि कई मामलों में चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए जाते और बरसात के मौसम में पानी भरने से आसपास का इलाका भी करंट की चपेट में आ सकता है, जिससे लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता है।
अदालत ने राज्य सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक योजना बनाने की आवश्यकता भी जताई।
राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई किए जाने पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिए जाने और इसी प्रकार की नई घटनाएं सामने न आने को देखते हुए हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका को अभिलेखों में दर्ज करते हुए बंद किया।

