छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने AIIMS रायपुर और अन्य सरकारी अस्पतालों की दयनीय स्थिति को लेकर मीडिया रिपोर्टों पर राज्य सरकार से मांगा जवाब
Amir Ahmad
7 Aug 2025 11:38 AM IST

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य भर के सरकारी अस्पतालों, खासकर राजधानी रायपुर में की भयावह और घटिया स्थिति को गंभीरता से लिया।
न्यायालय का यह हस्तक्षेप कई खबरों के बाद आया, जिनमें एक हिंदी दैनिक की खबर भी शामिल थी। इसमें बताया गया कि कैसे AIIMS रायपुर में मरीजों को डॉक्टर से परामर्श के लिए रजिस्ट्रेशन के बाद लगभग 48 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा,
“राज्य की अधिकांश आबादी निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने की आर्थिक क्षमता नहीं रखती और उनकी स्वास्थ्य सेवाएं मुख्यतः सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं। फिर भी मरीजों को रजिस्ट्रेशन से लेकर डॉक्टर से मिलने तक कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल एम्स, रायपुर की स्थिति बेहद दयनीय है, जहां मरीज़ों के रजिस्ट्रेशन के बाद डॉक्टर के पास पहुंचने में लगभग 48 घंटे लग जाते हैं। वहां लंबी कतारें लगती हैं और मरीज़ों का बहुत समय अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए बर्बाद हो रहा है। जांच के बाद सर्जरी चार महीने बाद हो रही है, जिससे मरीज़ों को अपनी बीमारियों के अलावा अनावश्यक रूप से परेशानी हो रही है। एक्स-रे कराने के लिए भी मरीज़ों को तीन घंटे लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है।”
न्यायालय ने एक अन्य समाचार का हवाला दिया जिसमें बताया गया कि गर्भावस्था किट जो खराब परिणाम देती हैं और घटिया गुणवत्ता वाली सर्जिकल सामग्री और दवाइयां वितरित की जा रही हैं, जबकि खराब सामग्री की आपूर्ति करने वाली कंपनी को आगे कोई सामग्री न देने का निर्देश दिया गया। रिपोर्ट में आगे बताया गया कि कुछ जीवन रक्षक दवाएं जो घटिया गुणवत्ता की पाई गईं और लैब टेस्ट में विफल रहीं भी प्रचलन में थीं।
इस संबंध में खंडपीठ ने कहा,
“उपर्युक्त समाचार अत्यंत भयावह स्थिति को दर्शाता है और यदि उपरोक्त समाचार सही है तो मरीजों की स्थिति का अंदाजा अच्छी तरह लगाया जा सकता है। यह राज्य के स्वास्थ्य विभाग और CGMSC की कार्यप्रणाली पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।”
न्यायालय ने बिलासपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित एक अन्य समाचार रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया जिसमें बताया गया कि रिकॉर्ड में 15 डॉक्टरों की उपस्थिति के बावजूद सुबह 11:15 बजे तक कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था और 250 से अधिक मरीज सुबह से ही कतार में खड़े है, जबकि एक्स-रे यूनिट जैसी महत्वपूर्ण मशीनें एक साल से भी अधिक समय से बंद पड़ी थीं। इसके अतिरिक्त एक 'हमार लैब' जहां विभिन्न प्रकार के परीक्षण किए जा सकते थे और मिनटों में रिपोर्ट प्राप्त की जा सकती थी छत्तीसगढ़ मेडिकल सेवा निगम (CGMSC) से अभिकर्मक आपूर्ति की कमी के कारण काफी हद तक बंद पड़ी थी।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में इन चिंताजनक खामियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य विभाग के सचिव को उपरोक्त समाचार रिपोर्टों के संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।
यह मामला अब 12 अगस्त 2025 को सूचीबद्ध है।
केस टाइटल: स्वतः संज्ञान से जनहित याचिका बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य

