छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को दी जमानत
Amir Ahmad
3 Jan 2026 5:05 PM IST

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को जमानत दी।
ये मामले वर्ष 2019 से 2023 के बीच कथित रूप से संचालित एक शराब सिंडिकेट घोटाले से संबंधित हैं, जिसमें राज्य को लगभग 4,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का आरोप है।
मामले की शुरुआत 17 जनवरी 2024 को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज FIR से हुई थी। इसमें अवैध शराब बिक्री, होलोग्राम की जालसाजी और कमीशनखोरी के जरिए बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए।
इसी FIR को आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया और कथित अपराध की आय को रियल एस्टेट परियोजनाओं और शेल कंपनियों के माध्यम से खपाने की जांच शुरू की।
ED ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई, 2025 को गिरफ्तार किया था, जबकि ईओडब्ल्यू ने उन्हें 24 सितंबर, 2025 को अपनी FIR में गिरफ्तार किया।
PMLA मामले में चैतन्य बघेल की ओर से दलील दी गई कि उनकी गिरफ्तारी चयनात्मक और भेदभावपूर्ण कार्रवाई का परिणाम है, क्योंकि न तो उनका नाम प्रारंभिक ECIR में था और न ही पहली चार अभियोजन शिकायतों में।
बचाव पक्ष ने समानता का आधार उठाते हुए यह भी कहा कि कथित रूप से अधिक भूमिका निभाने वाले सह-आरोपी, जैसे अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा, को पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय ने इसका विरोध करते हुए कहा कि चैतन्य बघेल ने अपनी राजनीतिक पहुंच का उपयोग कर पूरे घोटाले का संचालन किया और एक संगठित भ्रष्टाचार तंत्र खड़ा किया।
ED ने यह भी आरोप लगाया कि अभियुक्त और उनके पिता ने गवाहों को डराने-धमकाने का प्रयास किया, जिससे जांच प्रभावित हुई।
ईओडब्ल्यू मामले में बचाव पक्ष ने दलील दी कि 24 सितंबर, 2025 की गिरफ्तारी 'एवरग्रीन कस्टडी' का उदाहरण है, ताकि PMLA मामले में जमानत की स्थिति बनने पर भी अभियुक्त जेल में ही बना रहे।
यह भी कहा गया कि 21 महीने की जांच के दौरान न तो कोई समन जारी किया गया और न ही तलाशी ली गई, जिससे यह स्पष्ट है कि हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं थी।
इसके अतिरिक्त, आगे की जांच के लिए न्यायालय से अनुमति न लेने के आधार पर आरोपपत्रों को अवैध बताया गया।
राज्य सरकार और ईओडब्ल्यू ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि चैतन्य बघेल घोटाले की आय के लेखा-जोखा और उसके लेन-देन के प्रमुख सूत्रधार थे।
एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि अभियुक्त की प्रभावशाली स्थिति से गवाहों को प्रभावित करने का गंभीर खतरा बना हुआ है। उनकी हिरासत पूरे भ्रष्टाचार नेटवर्क को उजागर करने के लिए आवश्यक है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में चैतन्य बघेल को जमानत देने का आदेश पारित किया।

