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ज़मानत के लिए हमें विशेष कानून की ज़रूरत क्यों है?

LiveLaw News Network
5 Sep 2022 12:11 PM GMT
ज़मानत के लिए हमें विशेष कानून की ज़रूरत क्यों है?
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ज़मानत (Bail)शब्द दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (सीआरपीसी) के अध्याय 33 में दिया गया है। दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के प्रावधानों में कहीं भी ज़मानत शब्द की परिभाषा नहीं है तथा अध्याय 33 में ज़मानत शब्द अवश्य प्राप्त होता है।

जब भी किसी अभियुक्त को जेल में रखा जाता है तब उस पर अन्वेषण, जांच और विचारण या अपील की कार्यवाही लंबित रहती है। ऐसी स्थिति में यह तय नहीं होता है कि किसी प्रकरण में यदि किसी व्यक्ति को अभियुक्त बनाया है तो वह अभियुक्त दोषमुक्त होगा या दोषसिद्ध होगा।

ज़मानत का अर्थ विस्तृत है, परंतु आपराधिक विधि में ज़मानत से तात्पर्य है- 'किसी अपराध में किसी व्यक्ति को न्यायालय में पेश कराने की जिम्मेदारी लेना।' इससे सरल शब्दों में ज़मानत को परिभाषित नहीं किया जा सकता है। अदालत में अभियुक्त को समय-समय पर पेश कराने एवं जब भी न्यायालय अभियुक्त को न्यायालय में प्रस्तुत होने के लिए आदेश करें, तब उसके प्रस्तुत होने की गारंटी लेने वाले व्यक्ति को जमानतदार (Surety) कहा जाता है।

इस वीडियो में हम जानेंगे कि आखिर ज़मानत के लिए हमें विशेष कानून की ज़रूरत क्यों है?


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