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जब क़ानून में वैकल्पिक मशीनरी का प्रावधान है तो चुनाव के मामलों में रिट दायर करना उचित नहीं है : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
19 Feb 2020 5:31 AM GMT
जब क़ानून में वैकल्पिक मशीनरी का प्रावधान है तो चुनाव के मामलों में रिट दायर करना उचित नहीं है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक बार जब क़ानून के तहत वैकल्पिक मशीनरी का प्रावधान किया गया है, तो चुनाव के मामलों में रिट दायर करना उचित तरीक़ा नहीं है।

वर्तमान मामले में, ग्राम पंचायत चुनाव में एक उम्मीदवार के नामांकन को चुनाव अधिकारी ने स्वीकार क्या जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई जिसके बाद इसकी आंशिक अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील में यह कहा गया कि नामांकन पत्र स्वीकार करने को संविधान के अनुच्छेद 243-O को देखते हुए चुनौती नहीं दी जा सकती क्योंकि महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के तहत इसके उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है।

न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-O के तहत यह प्रावधान है कि किसी भी पंचायत के किसी चुनाव पर आपत्ति नहीं उठाई जा सकती है बशर्ते कि यह अपील सिर्फ़ राज्य के क़ानून के तहत ऐसे अथॉरिटी या ऐसे तरीक़े से पेश किया गया हो। फिर, महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा 15A के तहत अदालत को चुनावी मामले में हस्तक्षेप से रोका गया है।

अदालत ने आगे कहा कि मोहिंदर सिंह गिल एवं अन्य बनाम मुख्य चुनाव आयुक्त, नई दिल्ली के मामले में अदालत ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 329 में कहा गया है कि इस संविधान में भले ही कुछ भी कहा गया है,, किसी भी सदन के चुनाव को सिर्फ़ चुनाव याचिका के द्वारा ही चुनौती दी जा सकती है। कुछ अन्य फ़ैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा,

"1959 अधिनियम की धारा 10A और अधिनियम 1961 की धारा 9A संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत एक ही मामले हैं। जिन फ़ैसलों का हवाला दिया गया है उनको देखते हुए हमने पाया है कि किसी उम्मीदवार के नामांकन पत्र को स्वीकार करने या रद्द करने के कारण पीड़ित व्यक्ति की शिकायत का निपटारा 1959 अधिनियम की धारा 15A के तहत चुनव्वी याचिका से हो सकता है।

उक्त अधिनियम अपने आप में एक पूर्ण संहिता है जिसमें चुनाव से संबंधित शिकायतों के निपटारे के बारे में प्रावधान हैं। हाईकोर्ट यद्यपि अनुच्छेद 226 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करता है पर इस तरह के अधिकार विवेकाधीन होता है और जब पर्याप्त वैकल्पिक उपचार उपलब्ध है तो उस स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 243-O के तहत इसके प्रयोग से बचना चाहिए।

एक बार जब वैकल्पिक मशीनरी क़ानून के तहत उपलब्ध कराया गया है, तो रिट क्षेत्राधिकार का प्रयोग उचित उपाय नहीं है। हाईकोर्ट के लिए यह उचित होगा कि वह चुनाव के मामलों मने किसी तरह से हस्तक्षेप नहीं करे विशेषकर चुनाव परिणामों के घोषित कर दिए जाने के बाद और उसे विधान के तहत उपलब्ध उपचार की ओर निर्देशित करना चाहिए। उपरोक्त को देखते हुए, रिट याचिका पर हाईकोर्ट को विचार नहीं करना चाहिए था"।

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