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लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला क्या पेंशन का लाभ पाने की हकदार होगी? मद्रास हाईकोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा

LiveLaw News Network
10 Jun 2021 8:45 AM GMT
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला क्या पेंशन का लाभ पाने की हकदार होगी? मद्रास हाईकोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा
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मद्रास हाईकोर्ट ने बड़ी बेंच को यह सवाल भेजा है कि क्या पुरुष के जीवनकाल में निरंतर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला, उसकी पहली पत्नी की मृत्यु के बाद एक पत्नी का दर्जा प्राप्त कर लेती है ताकि पति की मृत्यु के बाद वह पेंशन का लाभ प्राप्त कर सके।

न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन की एकल न्यायाधीश पीठ ने बड़ी पीठ के विचार के लिए निम्नलिखित प्रश्न को संदर्भित किया हैः

''...एक उपपत्नी, घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 का अधिनियमन लागू होने के बाद, अपने पति के जीवनकाल के दौरान पहली पत्नी की मृत्यु के बाद एक साथी/ पत्नी का दर्जा प्राप्त कर लेती है और क्या निरंतर लिव-इन में रहने कारण वह मृतक व्यक्ति की पेंशन और अन्य संबंधित लाभ प्राप्त करने के लिए भी पत्नी का दर्जा प्राप्त कर लेती है।''

एक मृत व्यक्ति की दूसरी पत्नी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद यह सवाल बड़ी बेंच के पास भेजा गया है। इस महिला ने अधीक्षक अभियंता, टीएएनजीईडीसीओ द्वारा पारित आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसमें पति की मृत्यु के कारण पेंशन राशि निकालने की मांग करने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता, मृतक की पहली पत्नी की बहन है। वर्ष 2009 में पहली पत्नी की कैंसर के कारण मौत हो जाने के बाद उसका नाम मृतक के पेंशन खाते में नामित व्यक्ति के रूप में जोड़ा गया था।

याचिकाकर्ता का मामला यह था कि उसे अपनी बहन के पति से शादी करने के लिए कहा गया था। यह भी प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता और मृतक की पहली पत्नी (याचिकाकर्ता की बहन) दोनों अपनी बहन की शादी के बाद एक ही छत के नीचे रहती थी।

इस प्रकार यह प्रस्तुत किया गया था कि वह तमिलनाडु पेंशन रूल्स, 1978 के नियम 49 के अनुसार अपने पति की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को पाने की हकदार है।

मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने कहा किः

''हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 दूसरी शादी की अनुमति नहीं देता है। अगर पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी शादी की जाती है तो यह दूसरी शादी वैध हो जाती है। लेकिन, इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के लागू होने के बाद, यहां तक कि शादी के बिना भी, जब एक पुरुष और महिला के बीच लिव-इन-रिलेशनशिप का तथ्य स्थापित हो जाता है, तो इसे कानूनी रूप से वैध माना जाता है और समय के साथ-साथ महिला को पत्नी का दर्जा प्राप्त हो जाता है। लेकिन, पति की मृत्यु के बाद, यदि दो पत्नियां जीवित हैं, तो दूसरी पत्नी को तब तक 'पत्नी' का कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं होगा, जब तक कि पर्सनल लॉ इसकी अनुमति न दे।''

कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 ''यह नहीं बताता है कि एक विवाहित पुरुष का अविवाहित महिला के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप नहीं हो सकता है या विवाहित महिला किसी भी व्यक्ति के साथ संबंध नहीं रख सकती है'' विशेष रूप से तब जब सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को निरस्त कर दिया है।

अदालत का यह भी विचार था कि तमिलनाडु पेंशन रूल्स 1978 का नियम 49 बैकसीट पर और ''घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 ड्राइवर की सीट पर आ जाएगा'' क्योंकि महिला को सुरक्षा देनी होगी और नियम किसी कानून का स्थान नहीं ले सकता है।

कोर्ट ने कहा कि,''घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के आलोक में, यदि लिव-इन-रिलेशनशिप स्थापित हो जाता है, तो महिला को पत्नी का दर्जा प्राप्त होता है। कानून की सीमा केवल सहजीवन पर विचार करने पर टिकी होती है, जो पहली पत्नी की मृत्यु के बाद भी जारी रहा है।''

इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि,

''मेरा विचार है कि, पहली पत्नी की मृत्यु की तारीख से दूसरी पत्नी को पत्नी का मानद दर्जा प्राप्त होता है, यदि पति पहली पत्नी की मृत्यु की तारीख पर जीवित था। साथ ही, जब अज्ञात संबंध पति की मृत्यु के बाद सामने आता है तो ऐसी महिला किसी भी राहत की हकदार नहीं हो सकती है, जब तक कि पर्सनल लॉ एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं देता है या सक्षम न्यायिक फोरम से दूसरी पत्नी अपनी कानूनी स्थिति के संबंध में पहली पत्नी(अगर वह जीवित है) को पक्षकार बनाते हुए घोषणा प्राप्त नहीं कर लेती है।''

निम्नलिखित प्रश्नों को बड़ी पीठ को भेजा गया हैः

(1) क्या तमिलनाडु पेंशन रूल्स 1978 का नियम 49, घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत महिलाओं को दिए गए अधिकारों को छीन सकता है?

(2) एक उपपत्नी, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के लागू होने के बाद अपने पति के जीवनकाल के दौरान पहली पत्नी की मृत्यु के बाद एक साथी/पत्नी का दर्जा प्राप्त करती है और क्या निरंतर लिव-इन में रहने कारण वह मृतक व्यक्ति की पेंशन और अन्य संबंधित लाभ प्राप्त करने के लिए भी पत्नी का दर्जा प्राप्त कर लेती है।

केस का शीर्षकः मलारकोडी उर्फ मलार बनाम मुख्य आंतरिक लेखा-परीक्षा अधिकारी व अन्य

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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