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पश्चिम घाट- पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्राकृतिक वॉटरफॉल के प्रवाह को अवैध रूप से मोड़ने पर मद्रास हाईकोर्ट ने प्राइवेट रिसॉर्ट्स के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया

Brij Nandan
24 Nov 2022 10:32 AM GMT
God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
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मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को तेनकासी, तिरुनेलवेली, कन्याकुमारी, कोयम्बटूर और ऊटी के जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे अपनी संपत्ति पर कृत्रिम जलप्रपात बनाने वाले निजी रिसॉर्ट्स द्वारा जलप्रपातों के प्राकृतिक प्रवाह के अवैध प्रवाह को रोकने के लिए एक समिति गठित करें।

अदालत ने कहा,

"हमारा विचार है कि प्राकृतिक जलप्रपात जो हजारों वर्षों के प्राकृतिक टूट-फूट, कटाव और भू-आकृतिक परिवर्तनों के बाद उभरता है, उसे प्राइवेट रिसॉर्ट्स को अवैध तरीकों से काटने और मोड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।"

जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस सत्य नारायण प्रसाद की मदुरै खंडपीठ ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे निजी रिसॉर्ट्स या सम्पदा के निरीक्षण के लिए अपने जिलों में एक समिति बनाएं।

कोर्ट ने कहा,

"समिति उन प्राइवेट रिसॉर्ट्स का पता लगाएगी जिन्होंने अवैध रूप से प्राकृतिक झरनों के प्रवाह को अपनी संपत्तियों में बदल दिया और कृत्रिम झरने बनाए और अगले आदेश तक उन प्राइवेट रिसॉर्ट्स को तुरंत सील करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"

कोर्ट ने जिलाधिकारियों को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया, जो इस तरह के डायवर्जन के लिए प्राइवेट रिसॉर्ट मालिकों के साथ सांठगांठ करते पाए जाते हैं।

इसके अलावा, ऐसे निजी रिसॉर्ट्स/संपदाओं/संपत्तियों के मालिकों के खिलाफ भी आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाएगी। जिला कलेक्टरों को यह भी निर्देशित किया जाता है कि ऐसे अवैध डायवर्जन के लिए ऐसे प्राइवेट रिसॉर्ट्स के मालिकों के साथ सांठगांठ करने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।

अदालत ने तिरुनेलवेली के निवासी आर विनोथ की याचिका पर उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश पारित किया, जिन्होंने अवैध कृत्रिम निजी झरने बनाए हैं और नाजुक पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी तंत्र में जल निकायों के मूल प्रवाह को प्रभावित किया है।

याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि कुछ व्यक्तियों जिनके पास झरने के आस-पास की भूमि थी, ने उचित अधिकारियों से अनुमति प्राप्त किए बिना, केवल भारी लाभ प्राप्त करने के लिए अपने रिसॉर्ट्स को पर्यटकों के आकर्षण के रूप में बनाना के उद्देश्य के लिए, झरने के प्राकृतिक प्रवाह को मोड़कर अपने रिसॉर्ट्स के अंदर निजी या मानव निर्मित या कृत्रिम झरने बनाए हैं।

याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत किया कि इस तरह के अवैध परिवर्तन गंभीर पर्यावरणीय क्षति का कारण बनेंगे और यहां तक कि पहले से ही लुप्तप्राय प्रजातियों को विलुप्त होने के कगार पर धकेल देंगे।

यह आगे प्रस्तुत किया गया कि कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को उजागर किया है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।

अधिकारियों को एक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए अदालत ने मामले को 01 दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

केस टाइटल: विनोथ आर बनाम अतिरिक्त मुख्य सचिव, सरकार एंड अन्य

साइटेशन: 2022 लाइव लॉ 478


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