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'हम मामले को तय करने में भयभीत नहीं हैं': बॉम्बे हाईकोर्ट ने परम बीर सिंह को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दिए बयान वापस लेने को कहा

LiveLaw News Network
24 May 2021 2:45 PM GMT
हम मामले को तय करने में भयभीत नहीं हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने परम बीर सिंह को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दिए बयान वापस लेने को कहा
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह की याचिका के एक पैराग्राफ पर आपत्ति जताई, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट ने उनकी बात नहीं सुनी। इसके साथ ही परम बीर सिंह ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह एक हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को अपना बयान स्पष्ट करेंगे।

परम बीर सिंह ने कोर्ट के समक्ष ठाणे पुलिस द्वारा प्राथमिकी के संबंध में की जा रही जांच में राहत नहीं मांगने का भी वादा किया, जब राज्य ने उन्हें 9 जून, 2021 तक उक्त प्राथमिकी में गिरफ्तार नहीं करने के लिए सहमति दी।

सोमवार को न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एन आर बोरकर की अवकाश पीठ सिंह की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें ठाणे पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने या मामले को जांच के लिए सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।

राज्य के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता डेरियस खंबाटा ने सुनवाई के दौरान कहा कि 13 मई को वर्तमान याचिका में राज्य द्वारा बयान दिए जाने के बाद सुनवाई और सुरक्षा प्रदान करने के बावजूद सिंह ने सुप्रीम के समक्ष तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। खंबाटा ने कहा कि सिंह ने दावा किया कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के समक्ष उनकी याचिकाओं पर या तो सुनवाई नहीं हुई या उन्हें सुनवाई का मौका दिए बिना बाद की तारीख के लिए स्थगित कर दिया गया।

पीठ ने सिंह के दावों पर आपत्ति जताई और कहा कि कृपया इसे हमसे ले लें। हम मामले को तय करने में भयभीत नहीं हैं। कृपया (एससी को) यह धारणा न दें कि हाईकोर्ट फैसला नहीं कर रहा है। पीठ ने आगे कहा कि बयान वापस लेने के लिए कदम उठाएं। आप कैसे कह सकते हैं कि मामले की सुनवाई नहीं हुई और कोई आदेश पारित नहीं किया गया।

एडवोकेट खंबाटा की दलीलों से असहमति जताते हुए सिंह की ओर से पेश वकील- वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने शुरुआत में कहा कि सिंह याचिका में संशोधन करेंगे और पैराग्राफ को सही करते हुए सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करेंगे।

परमबीर सिंह ने ठाणे पुलिस द्वारा उन पर और 32 अन्य के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और आईपीसी के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के लिए मामला दर्ज कराया था।

एडवोकेट जेठमलानी ने सोमवार को अपनी दलीलें शुरू करते हुए कहा कि बॉम्बे एचसी ने सिंह को शुक्रवार को राहत दी है। उन्होंने पीठ से सभी मामलों को क्लब करने का अनुरोध किया; वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला की याचिका, परम बीर की दो खारिज करने वाली याचिकाएं और राज्य की याचिका जिसमें अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई की प्राथमिकी से दो पैराग्राफ हटाने की मांग की गई थी।

एडवोकेट खमाबाटा ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि न्यायमूर्ति एसजे कथावाला के नेतृत्व वाली पीठ ने समय की कमी के कारण ही राहत दी और राज्य ने बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मैरिट के आधार पर राहत नहीं दी गई।

न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा कि पीठ इस विशेष संयोजन में केवल एक सप्ताह के लिए बैठी है और चूंकि वह आपराधिक कार्य के साथ नियमित पीठ का नेतृत्व करेंगे, इसलिए वह मामले को एक बार में सुनना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि आपको इस बारे में सोचना चाहिए और कहा कि छुट्टी के बाद सभी पक्षों को लंबे समय तक सुना जा सकता है।

मूल शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएस तालेकर ने कहा कि सिंह की सुरक्षा तब तक जारी नहीं रहनी चाहिए। खंबाटा ने यह भी बताया कि सिंह ने पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई की मांग की, बिना यह बताए कि राज्य ने पहले ही उन्हें गिरफ्तार नहीं करने का बयान दिया था। उन्होंने कहा, यह बहुत गंभीर मामला है।

जेठमलानी ने जवाब में कहा कि सिंह के खिलाफ सभी कार्रवाई प्रतिशोध से प्रेरित है क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री को तत्कालीन राज्य गृहमंत्री अनिल देशमुख और अन्य के खिलाफ पत्र लिखा था। खंबाटा ने जवाब देते हुए कहा कि प्रतिशोध कहना बहुत आसान है। एक पत्र आप मुख्यमंत्री को लिखते हैं और आप सभी प्राथमिकी में छूट चाहते हैं।

एडवोकेट बाली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मांगी जा रही राहत अलग है क्योंकि इसमें विभागीय जांच सहित सिंह के खिलाफ की गई सभी कार्रवाई शामिल है।

पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कुछ राहतें मेल खाती हैं। बाली ने कहा कि मैं यहां पूरी जिम्मेदारी के साथ खड़ा हूं। सुप्रीम कोर्ट में राहत अलग है।

जस्टिस शिंदे ने कहा कि कृपया इसे हमसे ले लें, हम मामले में निणर्य लेने से नहीं डरते नहीं हैं। कृपया (एससी को) यह धारणा न दें कि एचसी फैसला नहीं कर रहा है।

एडवोकेट खंबाटा ने सिंह की एससी याचिका के पैरा 10 की ओर इशारा करते हुए कहा कि तीन दिन बाद मैंने (एचसी में) बयान दिया कि राज्य उसे एक हफ्ते तक गिरफ्तार नहीं करेगा, जब तक कि मैं जवाब दाखिल नहीं करता वे सुप्रीम कोर्ट को बताते हैं कि उसकी बात नहीं सुनी जा रही है।

पीठ ने इसके जवाब में कहा कि वे इस मामले की आज ही सुनवाई करेंगे। हम मामले की सुनवाई करेंगे। कृपया बहस करना शुरू करें। बयान वापस लेने के लिए कदम उठाएं। आप कैसे कह सकते हैं कि मामले की सुनवाई नहीं हुई और कोई आदेश पारित नहीं किया गया?" तालेकर ने कहा कि सिंह जो कर रहे हैं वह फोरम शॉपिंग से कम नहीं है। एडवोकेट जेठमलानी ने तब प्रस्तुत किया कि सुप्रीम कोर्ट की याचिका में संशोधन किया जाएगा और गलत बयान वापस ले लिया जाएगा।

पीठ ने इस बीच सुझाव दिया कि छुट्टी के बाद मामले को उठाया जा सकता है और राज्य को तदनुसार संरक्षण पर निर्देश लेने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अगर आम सहमति हो तो हम इसे 9 जून को सभी संकलनों के साथ रख सकते हैं। लेकिन अगर आप जोर देते हैं तो हम इसे आज भी सुनने के लिए तैयार हैं।

एडवोकेट खंबाटा ने कहा कि सिंह एक साथ दो घोड़ों की सवारी नहीं कर सकते। आगे खंबाटा ने कहा कि वह हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के साथ मामले को आगे नहीं बढ़ा सकते हैं। आगे कहा कि मैंने निर्देश ले लिया है, अगर वे 9 जून तक सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर आगे नहीं बढ़ेंगे तो हम उन्हें गिरफ्तार नहीं करेंगे।

एडवोकेट जेठमलानी ने कहा कि चूंकि संरक्षण केवल वर्तमान प्राथमिकी के संबंध में है, इसलिए सिंह को एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है यदि वह जांच के लिए मुंबई आते हैं।

एडवोकेट जेठमलानी ने हालांकि अदालत को आश्वासन दिया कि सिंह मौजूदा प्राथमिकी में उच्चतम न्यायालय के समक्ष राहत की मांग नहीं करेंगे।

पीठ ने खंबाटा और जेठमलानी के बयान दर्ज किए और मामले की सुनवाई नौ जून तक के लिए स्थगित कर दी। पीठ ने कहा कि पक्षकारों के बीच आम सहमति है कि मामले की सुनवाई 9 जून को नियमित पीठ के समक्ष हो।

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